Rajya Sabha Election : देश के 10 राज्यों की 37 सीटों को लेकर चल रही (राज्यसभा चुनाव) की राजनीतिक हलचल अब काफी हद तक साफ हो चुकी है। सोमवार को नामांकन वापसी की अंतिम तारीख के साथ ही यह लगभग तय हो गया कि किन राज्यों में मतदान होगा और किन राज्यों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाएंगे। मौजूदा स्थिति के अनुसार सात राज्यों की 26 सीटों पर निर्विरोध जीत का रास्ता साफ माना जा रहा है, जबकि अब केवल तीन राज्यों की 11 सीटों के लिए मुकाबला शेष है। इस तरह पूरे देश में (राज्यसभा चुनाव) को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति अंतिम दौर में पहुंच गई है।
दरअसल देश के 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है, लेकिन उससे पहले ही (राज्यसभा चुनाव) की तस्वीर लगभग स्पष्ट हो गई है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख सोमवार रखी गई थी और इसके बाद तय हो जाएगा कि कहां मुकाबला होगा और कहां निर्विरोध जीत। फिलहाल जो गणित सामने आया है, उसके मुताबिक 10 राज्यों में से 7 राज्यों की 26 सीटों पर निर्विरोध सदस्य चुना जाना तय माना जा रहा है, जबकि तीन राज्यों की 11 सीटों के लिए अब सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा।
जिन राज्यों में (राज्यसभा चुनाव) के लिए सीटें खाली हुई हैं उनमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। इनमें से हरियाणा, ओडिशा और बिहार ऐसे राज्य हैं जहां निर्धारित सीटों से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतर गए हैं। यदि इन राज्यों में कोई उम्मीदवार अपना नाम वापस नहीं लेता है तो 16 मार्च को मतदान के जरिए फैसला होगा। इसी वजह से इन तीन राज्यों में (राज्यसभा चुनाव) को लेकर सियासी हलचल सबसे ज्यादा तेज हो गई है।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा, ओडिशा और बिहार में होने वाले (राज्यसभा चुनाव) के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी कर दी है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने बिहार के लिए दो और ओडिशा तथा हरियाणा के लिए एक-एक वरिष्ठ नेता को जिम्मेदारी सौंपी है। इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी इन तीनों राज्यों में होने वाले मुकाबले को बेहद गंभीरता से ले रही है। वहीं दूसरी ओर सात राज्यों की 26 सीटों पर निर्विरोध सदस्यों के नाम सोमवार शाम तक घोषित किए जाने की संभावना है।
अगर उन राज्यों की बात करें जहां मुकाबला होना तय है तो उनमें हरियाणा, बिहार और ओडिशा शामिल हैं। इन तीनों राज्यों में निर्धारित सीटों से अधिक उम्मीदवार मैदान में होने के कारण अब मतदान के जरिए फैसला होगा। इसी वजह से इन राज्यों में (राज्यसभा चुनाव) बेहद रोचक हो गया है और सभी दल अपने-अपने विधायकों को साधने में जुट गए हैं।
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ओडिशा में 4 सीटों के लिए 5 उम्मीदवार
ओडिशा में चौथी सीट के लिए दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। बीजेपी ने मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि दिलीप रे को भी पार्टी का समर्थन मिला हुआ है। वहीं बीजेडी ने संतृप्त मिश्रा को मैदान में उतारा है और कांग्रेस ने डॉ. दत्तेश्वर मिश्रा को समर्थन दिया है। माना जा रहा है कि बीजेपी के दो और बीजेडी के एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय है, लेकिन चौथी सीट के लिए कड़ा मुकाबला होगा। इसी कारण ओडिशा में (राज्यसभा चुनाव) को लेकर सियासी गणित बेहद दिलचस्प हो गया है।
ओडिशा विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 30 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। बीजेपी के पास अपने 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी मिला हुआ है। इस तरह कुल 82 विधायक उसके साथ हैं, जो तीन सीटों के लिए आवश्यक संख्या से आठ कम माने जा रहे हैं। वहीं बीजेडी के पास 48 विधायक हैं। ऐसे में एक सीट जीतने के बाद उसके पास 18 अतिरिक्त वोट बच सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही अतिरिक्त वोट चौथी सीट के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं और (राज्यसभा चुनाव) का परिणाम तय कर सकते हैं।
बिहार में रोचक हुआ मुकाबला
बिहार में भी पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला काफी रोचक हो गया है। यहां पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं। बीजेपी की ओर से नितिन नबीन और शिवेश कुमार उम्मीदवार हैं, जबकि जेडीयू ने रामनाथ ठाकुर और नीतीश कुमार को मैदान में उतारा है। एनडीए की ओर से पांचवें उम्मीदवार के रूप में उपेंद्र कुशवाहा को उतारा गया है। दूसरी तरफ आरजेडी ने अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारकर (राज्यसभा चुनाव) को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है।
बिहार में एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। एनडीए के पास करीब 202 विधायक हैं, जबकि विपक्ष के पास लगभग 35 विधायक बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ अन्य विधायक भी हैं जिनकी भूमिका अहम हो सकती है। माना जा रहा है कि बीजेपी और जेडीयू के दो-दो उम्मीदवार आसानी से जीत सकते हैं, लेकिन पांचवीं सीट के लिए मुकाबला कड़ा होगा। इसी वजह से बिहार में (राज्यसभा चुनाव) का गणित लगातार बदलता नजर आ रहा है।
हरियाणा में भी मुकाबला कड़ा
हरियाणा में भी मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। यहां दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। बीजेपी ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से कर्मवीर बौद्ध मैदान में हैं। वहीं सतीश नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन भरकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। माना जा रहा है कि एक सीट पर बीजेपी की जीत लगभग तय है, लेकिन दूसरी सीट के लिए कड़ा संघर्ष होगा और यही वजह है कि हरियाणा में (राज्यसभा चुनाव) को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
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छत्तीसगढ़ समेत इन राज्यों की जानें स्थिति
इन तीन राज्यों को छोड़ दिया जाए तो देश के सात राज्यों में (राज्यसभा चुनाव) निर्विरोध होना लगभग तय है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, असम, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना ऐसे राज्य हैं जहां जितनी सीटें खाली हैं, उतने ही उम्मीदवार मैदान में हैं। इसलिए इन राज्यों में मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी और सभी उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाएंगे।
महाराष्ट्र में 7 उम्मीदवार
महाराष्ट्र में सात सीटों के लिए सात उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें बीजेपी से रामदास आठवले, विनोद तावड़े, माया चिंतामण इवनाते और रामदास वडकुट शामिल हैं। एनसीपी से पार्थ पवार और शिवसेना से ज्योति वाघमारे मैदान में हैं, जबकि एनसीपी (एसपी) से शरद पवार उम्मीदवार हैं। इसी तरह तमिलनाडु में छह सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं और सभी के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है।
बंगाल में 5 मैदान में
पश्चिम बंगाल में पांच सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि असम में तीन सीटों के लिए तीन उम्मीदवार हैं। छत्तीसगढ़ में दो सीटों के लिए दो उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें बीजेपी से लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस से फुलो देवी नेताम शामिल हैं। हिमाचल प्रदेश में एक सीट के लिए कांग्रेस के अनुराग शर्मा अकेले उम्मीदवार हैं और तेलंगाना में दो सीटों पर कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी मैदान में हैं। इन सभी राज्यों में (राज्यसभा चुनाव) निर्विरोध होने की संभावना है और सोमवार शाम तक आधिकारिक घोषणा भी की जा सकती है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो देश के 10 राज्यों में होने वाले (राज्यसभा चुनाव) की तस्वीर अब लगभग साफ हो चुकी है। सात राज्यों में 26 सीटें निर्विरोध तय मानी जा रही हैं, जबकि तीन राज्यों की 11 सीटों पर अब सियासी मुकाबला तय हो चुका है। ऐसे में 16 मार्च को होने वाले मतदान के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर किन दलों को अतिरिक्त बढ़त मिलती है और संसद के उच्च सदन में किसकी ताकत और मजबूत होती है।

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