रायगढ़। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारी अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर अडिग हैं। आज आंदोलन का 22 वां दिन है, और कर्मचारियों का रोटी, सम्मान और न्याय का संघर्ष जोरों पर है। नारे गूंज रहे हैं: “एनएचएम कर्मचारियों का रोटी के लिए संघर्ष जारी! सेवा के बदले सम्मान दो! हमारी रोटी सुरक्षित करो! सम्मान, न्याय गारंटी दीजिए!”
ईसाई आदिवासी महासभा रायगढ़, छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासी कांग्रेस रायगढ़ जिलाध्यक्ष दिलीप केरकेट्टा, सुरेश खलखो और अलेक्जेंडर टोपनो ने माननीय विष्णु देव साय तथा श्याम बिहारी जायसवाल को समर्थन पत्र सौंपते हुए कहा कि हम आंदोलन का पूर्ण समर्थन करते हैं। समस्त NHM कर्मचारियों की मांगें पूर्णतः जायज हैं तथा इनका शीघ्र निराकरण किया जाए। संघ ने स्पष्ट किया कि आश्वासन नहीं, ठोस आदेश चाहिए।

रायगढ़ में कर्मचारियों ने “रोटी के बदले सम्मान” कार्यक्रम का आयोजन कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। मंच से स्पष्ट किया गया कि यह संघर्ष केवल वेतन या सुविधाओं तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा के बदले सम्मान और सुरक्षित भविष्य की गारंटी के लिए है।
एक दिन पूर्व स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कर्मचारियों से मुलाकात की और चार मांगों पर सहमति जताई, लेकिन कर्मचारी इसे भ्रमित करने वाली चाल मानते हैं। मुख्य मांग—सेवा का नियमितीकरण—अभी भी अनसुनी है। आरोप है कि सरकार आश्वासन तो देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती।
राज्य सरकार ने ‘नो वर्क, नो पे’ नीति लागू कर दी है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। टीकाकरण अभियान और सामान्य चिकित्सीय सेवाएं ठप हो गई हैं। आंदोलन के दौरान 25 नेताओं को बर्खास्त किया जा चुका है, जिससे नाराजगी चरम पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 14,000 से अधिक NHM कर्मियों ने विरोध में सामूहिक इस्तीफे दे दिए हैं।
सरकार ने कुछ मांगों पर आंशिक प्रगति दिखाई है, जैसे प्रदर्शन मूल्यांकन में पारदर्शिता, 30 दिन की आपातकालीन छुट्टी, 27% वेतन वृद्धि तथा 10 लाख रुपये तक का कैशलेस मेडिकल बीमा। लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नियमितीकरण, आरक्षण और पब्लिक हेल्थ कैडर जैसी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय न होने तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में हड़ताल का स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ रहा है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि सरकार की लिखित सहमति मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। हम अपील करते हैं कि तत्काल मांगों का समाधान हो, ताकि जन स्वास्थ्य प्रभावित न रहे।

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