मानवता को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना दंतेवाड़ा जिले के कोर्रा गांव (Newborn Baby Abandoned) से सामने आई है, जहां दो से तीन दिन की नवजात बच्ची जंगल में लावारिस हालत में मिली । महारापारा से लगे जंगल क्षेत्र में मिली इस मासूम की हालत बेहद गंभीर थी, लेकिन ग्रामीणों की सतर्कता और समय पर किए गए प्रयासों ने उसकी जिंदगी बचा ली।
जानकारी के अनुसार, गांव के कुछ ग्रामीण पास के जंगल में शिकार करने गए थे। देर रात करीब 11 बजे जब वे वापस लौट रहे थे, तभी तालाब किनारे से किसी बच्चे (Newborn Baby Abandoned) के रोने की आवाज सुनाई दी। पहले ग्रामीणों को लगा कि शायद कोई जानवर होगा, लेकिन आवाज लगातार आने पर वे मौके की ओर बढ़े। वहां पहुंचकर उन्होंने जो दृश्य देखा, उसने सभी को अंदर तक झकझोर दिया ।
तालाब किनारे मिली नवजात
तालाब किनारे जमीन पर एक नवजात (Newborn Baby Abandoned) बच्ची पड़ी हुई थी, जिसके शरीर पर बड़ी संख्या में चिंटियां चिपकी हुई थीं। बच्ची बेहद कमजोर अवस्था में रो रही थी और आसपास कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने बिना देर किए मानवता का परिचय देते हुए बच्ची को सावधानी से उठाया और गांव लेकर आए।
ग्रामीणों ने तुरंत साफ कपड़े से बच्ची के शरीर को साफ किया और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही जिला पंचायत उपाध्यक्ष महेश कुंजाम भी मौके पर पहुंचे। थोड़ी ही देर में स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस गांव पहुंच गई और बच्ची को तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया (Newborn Baby Abandoned)।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने रातभर बच्ची की निगरानी की। चिकित्सकों के अनुसार बच्ची के सिर पर सूजन है और शरीर के कई हिस्सों में चिंटियों के काटने के निशान पाए गए हैं। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि वह अभी दूध नहीं पी रही है, जिसे लेकर डॉक्टर लगातार प्रयास कर रहे हैं।
डॉक्टरों का अनुमान है कि बच्ची की उम्र लगभग दो से तीन दिन है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने के कारण उसे संक्रमण का खतरा था, लेकिन समय रहते अस्पताल पहुंचाने से बड़ी अनहोनी टल गई।
Newborn Baby Abandoned बदलते हालात चिंता बढ़ाने लगे
ग्रामीणों का कहना है कि बस्तर क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं पहले बेहद दुर्लभ थीं, लेकिन अब समाज में बदलते हालात चिंता बढ़ाने लगे हैं। लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी रही होगी, जिसने माता-पिता को इतनी छोटी बच्ची को जंगल में छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि ग्रामीण समय पर वहां नहीं पहुंचते, तो बच्ची की जान जा सकती थी या वह जंगली जानवरों का शिकार बन सकती थी। इस घटना ने पूरे इलाके को भावुक और स्तब्ध कर दिया है।
पुलिस और प्रशासन अब मामले की जांच में जुट गए हैं। आसपास के गांवों में पूछताछ की जा रही है ताकि बच्ची के माता-पिता का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि नवजात को जंगल में छोड़ना गंभीर अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ।
Newborn Baby Abandoned बच्ची का उपचार जारी
फिलहाल जिला अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में बच्ची का उपचार जारी है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि बच्ची की स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हो रही है और उसे विशेष देखभाल में रखा गया है। यह घटना न केवल मानवता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज को यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि नवजात जीवन की सुरक्षा और संवेदनशीलता को लेकर जागरूकता कितनी जरूरी है।







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