Sariya Baramkela News : छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना, जो महिलाओं को आर्थिक संबल देने के लिए शुरू की गई थी, अब ग्रामीण क्षेत्रों में ‘सिरदर्द’ बनती जा रही है। महतारी वंदन ई-केवाईसी (Mahtari Vandan e-KYC) की अनिवार्यता ने हजारों महिलाओं को इस भीषण गर्मी में सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है। साल्हेओना सहित पूरे बरमकेला ब्लॉक में आलम यह है कि सर्वर की सुस्ती और दस्तावेजों की त्रुटि ने सरकार के दावों की हवा निकाल दी है।
भीषण गर्मी और सुबह 6 बजे से च्वाइस सेंटरों पर ‘जंग’
पारा 42 डिग्री के पार पहुँच चुका है, लेकिन महतारी वंदन ई-केवाईसी (Mahtari Vandan e-KYC) कराने की मजबूरी महिलाओं को चैन से बैठने नहीं दे रही। साल्हेओना बस स्टैंड स्थित च्वाइस सेंटरों पर सुबह 6:30 बजे से ही महिलाओं की लंबी कतारें लग रही हैं। महिलाएं अपना घर-काज छोड़कर, बच्चों को गोद में लिए पंजीयन क्रमांक, आधार कार्ड और बैंक पासबुक लेकर पहुँच रही हैं। लेकिन च्वाइस सेंटर पहुँचते ही उन्हें पता चलता है कि ‘सर्वर डाउन’ है। घंटों इंतजार के बाद जब पोर्टल खुलता है, तो नई मुसीबत सामने खड़ी हो जाती है।
नाम और सरनेम की स्पेलिंग ने अटकाया ‘हक’
महतारी वंदन ई-केवाईसी (Mahtari Vandan e-KYC) की प्रक्रिया में सबसे बड़ा रोड़ा डेटा का मिलान न होना बन रहा है। पंजीयन के समय भरे गए नाम और आधार कार्ड में दर्ज नाम या सरनेम की स्पेलिंग में जरा सा भी अंतर होने पर पोर्टल दस्तावेज अपलोड ही नहीं कर रहा है। जिन महिलाओं ने शादी के बाद सरनेम बदल लिया या जिनके आधार में त्रुटि है, उन्हें ‘बैरंग’ वापस लौटाया जा रहा है। महिलाएं अब इसे सरकार की ‘चोचलेबाजी’ करार देकर कोसने लगी हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों के बाहर ‘सूची’ का सहारा
तकनीकी खामियों का आलम यह है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की आईडी तक नहीं खुल रही है। सूची का पीडीएफ न बन पाने के कारण साल्हेओना डीपापारा के आंगनबाड़ी केंद्रों के बाहर अब मैन्युअल सूचियां चस्पा की गई हैं। महिलाएं अपना नाम देखने के लिए वहां भी भीड़ लगा रही हैं। उन्हें डर है कि यदि महतारी वंदन ई-केवाईसी (Mahtari Vandan e-KYC) समय पर नहीं हुआ, तो उनकी आने वाली किश्तें रुक जाएंगी।
पेंशनधारी महिलाओं का फूटा गुस्सा Mahtari Vandan e-KYC
साल्हेओना की बुजुर्ग महिलाओं पुण्यमति निषाद, बरतमति सहिस, फूलबाई चौहान और रंगमति सामले—ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि उन्हें पहले से वृद्धावस्था या अन्य पेंशन मिल रही थी। सरकार ने वादा किया था कि महतारी वंदन योजना के तहत अलग से 1000 रुपये दिए जाएंगे। लेकिन हकीकत यह है कि पेंशन की राशि काटकर कुल मिलाकर केवल 1000 रुपये ही थमाए जा रहे हैं। महिलाओं का आरोप है कि यह उनके साथ धोखाधड़ी है। महतारी वंदन ई-केवाईसी (Mahtari Vandan e-KYC) की दौड़-भाग के बीच इस ‘कटौती’ ने आग में घी डालने का काम किया है।
सुधार के लिए परियोजना अधिकारी के भरोसे सिस्टम
दस्तावेजों में त्रुटि सुधारने के लिए अब महिलाओं को फिर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि सुधार केवल ‘परियोजना अधिकारी’ (Project Officer) की आईडी से ही संभव है। ग्रामीण क्षेत्रों की अनपढ़ और कम पढ़ी-लिखी महिलाएं इस जटिल प्रक्रिया में उलझ कर रह गई हैं। एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया का दम भरती है, वहीं महतारी वंदन ई-केवाईसी (Mahtari Vandan e-KYC) के लिए महिलाओं को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर की खाक छाननी पड़ रही है।

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