KCC Rules Update 2026 : छत्तीसगढ़ समेत देश के करोड़ों किसानों (KCC Reform) के लिए जल्द ही बड़ी राहत भरी खबर सामने आ सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना के ढांचे में व्यापक सुधार करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे कृषि क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस नई व्यवस्था को किसान क्रेडिट कार्ड के रूप में देखा जा रहा है, जिससे किसानों को अधिक लचीला और व्यवहारिक ऋण सिस्टम मिल सकेगा।
आरबीआई द्वारा 6 फरवरी को जारी नोटिफिकेशन में बताया गया कि तीन दशक पुराने किसान क्रेडिट कार्ड ढांचे की समीक्षा की जा रही है ताकि कृषि क्षेत्र में उभरती वित्तीय जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य किसानों को समय पर पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना और भुगतान से जुड़ा दबाव कम करना है।
वर्तमान में किसान क्रेडिट कार्ड के तहत किसानों को रियायती दर पर लोन मिलता है। केंद्र सरकार 2 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देती है, जबकि समय पर भुगतान करने पर अतिरिक्त 3 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलता है। इससे प्रभावी ब्याज दर घटकर लगभग 4 प्रतिशत वार्षिक रह जाती है। आरबीआई का मानना है कि इस योजना को और प्रभावी बनाने के लिए संरचनात्मक सुधार जरूरी हो गए हैं।
KCC Reform फसल आधारित लोन सिस्टम होगा लागू
प्रस्तावित नियमों के अनुसार अब फसल लोन को अवधि के आधार पर वर्गीकृत करने की योजना है। 12 महीने तक की अवधि वाली फसलों को शॉर्ट टर्म और 18 महीने तक की अवधि वाली फसलों को लॉन्ग टर्म श्रेणी में रखा जाएगा। इस बदलाव से राज्यों और बैंकों के बीच लोन स्वीकृति से जुड़ी असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी। यह कदम कृषि ऋण प्रणाली (KCC Reform) को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
KCC Reform लोन चुकाने की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव
आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड की कुल वैधता अवधि छह साल तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। खासकर लंबी अवधि वाली फसलों की खेती करने वाले किसानों को इससे राहत मिल सकती है। लंबे समय तक तैयार होने वाली फसलों में निवेश करने वाले किसानों को भुगतान का पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे आर्थिक दबाव कम होगा। यह सुधार किसान भुगतान संरचना (KCC Reform) को अधिक व्यावहारिक बनाएगा।
फसल लागत के अनुसार तय होगी लोन लिमिट
तीसरे बड़े बदलाव के तहत लोन लिमिट को फसल की वास्तविक लागत के आधार पर तय करने का प्रस्ताव है। अभी कई किसानों को जरूरत से कम ऋण मिलने की समस्या रहती है, जिससे खेती प्रभावित होती है। नई व्यवस्था में कार्यशील पूंजी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। इससे किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी और कृषि निवेश को मजबूती मिलेगी। इसे कृषि वित्त विस्तार (KCC Reform) का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
टेक्नोलॉजी और टिकाऊ खेती पर जोर
चौथे बदलाव में टेक्नोलॉजी आधारित खेती को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया गया है। आरबीआई ने कृषि परिसंपत्तियों की मरम्मत और रखरखाव के लिए दिए जाने वाले अतिरिक्त 20 प्रतिशत घटक के तहत पात्र खर्चों की सूची बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अब इसमें मिट्टी परीक्षण, रियल-टाइम मौसम पूर्वानुमान, जैविक प्रमाणन और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़े खर्च भी शामिल किए जा सकते हैं। यह पहल सस्टेनेबल एग्रीकल्चर मॉडल (KCC Reform) को आगे बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
KCC Reform हितधारकों से मांगी गई प्रतिक्रिया
आरबीआई ने इस प्रस्ताव पर कमर्शियल बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी संस्थानों, किसानों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इच्छुक पक्ष 6 मार्च 2026 तक आरबीआई की वेबसाइट के ‘Connect 2 Regulate’ प्लेटफॉर्म या ईमेल के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया भेज सकते हैं। सुझावों के आधार पर अंतिम गाइडलाइन जारी की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये बदलाव लागू होते हैं तो किसान क्रेडिट कार्ड योजना कृषि वित्त व्यवस्था में बड़ा सुधार साबित हो सकती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।







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