Vegetable Farming Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में उन्नत कृषि (Grafted Tomato Farming) तकनीकों के बढ़ते प्रयोग के बीच बलौदाबाज़ार-भाटापारा जिले के एक किसान ने यह साबित कर दिया है कि सही तकनीक और मार्गदर्शन से खेती को लाभ का मजबूत जरिया बनाया जा सकता है। भाटापारा ब्लॉक के कृषक युवराज साहू ने ग्राफ्टेड टमाटर की खेती अपनाकर न केवल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि एक सीजन में प्रति एकड़ लगभग तीन लाख रुपये का शुद्ध लाभ भी अर्जित किया है। रोग प्रतिरोधक क्षमता, मजबूत पौधे और कम लागत ने उनकी खेती की तस्वीर ही बदल दी है।

टमाटर की ग्राफ्टिंग (Grafted Tomato Farming) एक आधुनिक कृषि पद्धति है, जिसमें दो अलग-अलग किस्मों के पौधों को जोड़कर एक नया, अधिक मजबूत पौधा तैयार किया जाता है। इससे जड़ प्रणाली से जुड़ी बीमारियों, जैसे जड़ गलन और मुरझाने की समस्या, काफी हद तक समाप्त हो जाती है। युवराज साहू बताते हैं कि पहले वे पारंपरिक तरीके से टमाटर की खेती करते थे, लेकिन बार-बार रोग लगने और पौधों के सूखने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता था। उत्पादन अस्थिर रहता था और लागत निकलना भी मुश्किल हो जाता था।
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उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को नई तकनीक से जोड़ने के प्रयासों के तहत जब ग्राफ्टेड टमाटर (Grafted Tomato Farming) की खेती का प्रदर्शन उनके क्षेत्र में किया गया, तो युवराज साहू ने इसे अपनाने का निर्णय लिया। इसके परिणाम अपेक्षा से कहीं बेहतर निकले। ग्राफ्टेड टमाटर की खेती (Grafted Tomato Farming) में पौधे अधिक मजबूत होते हैं, उनकी बढ़वार बेहतर होती है और रोग का प्रकोप सामान्य खेती की तुलना में काफी कम देखा गया। इसका सीधा असर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर पड़ा।
कम पानी, कम मजदूरी और ज्यादा उत्पादन
युवराज साहू के अनुसार, इस तकनीक में पानी की खपत भी कम होती है, क्योंकि पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और वे मिट्टी से पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित करती हैं। साथ ही मजदूरी लागत में भी कमी आई है, क्योंकि रोग कम होने से बार-बार दवा छिड़काव और पौधों को बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। मजबूत पौधों के कारण फसल का जीवनकाल बढ़ जाता है और लंबे समय तक तुड़ाई संभव होती है, जिससे कुल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
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साल में दो से तीन बार मिल रहा उत्पादन
ग्राफ्टेड विधि से उगाए गए टमाटर की एक बड़ी विशेषता यह है कि इससे साल में दो से तीन बार उत्पादन लिया जा सकता है। युवराज साहू बताते हैं कि यह टमाटर (Grafted Tomato Farming) स्वाद और उपयोग में सामान्य टमाटर जैसा ही होता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग बनी रहती है। सब्जी के रूप में घरेलू उपयोग से लेकर थोक मंडियों तक, हर जगह इसे आसानी से बेचा जा सकता है। लगातार उत्पादन मिलने से किसानों की आय स्थिर और सुनिश्चित होती है।
सरकारी योजनाओं से मिला संबल
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत उद्यानिकी विभाग द्वारा ग्राफ्टेड सब्जी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के तहत प्रति प्रदर्शन 30,000 रुपये की अनुदान राशि दी जा रही है। जिले में 188 कृषकों का चयन कर उन्हें इस तकनीक का लाभ दिया जा रहा है। युवराज साहू मानते हैं कि यदि विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता न मिली होती, तो वे इस नवाचार को अपनाने का साहस नहीं कर पाते।
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(Grafted Tomato Farming) अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
आज युवराज साहू की सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। वे अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और अन्य किसानों को भी ग्राफ्टेड टमाटर की खेती (Grafted Tomato Farming) अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक व्यापक स्तर पर अपनाई जाए, तो न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि सब्जी उत्पादन में भी राज्य आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ेगा।


