Fish Farming : स्वरोजगार के नए द्वार, मछली पालन से बढ़ती आर्थिक समृद्धि

By admin
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Fish Farming

Intensive Fish Farming : राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार (Self Employment) के नए द्वार खोल दिए हैं। इस प्रयास का लाभ उठाते हुए बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखंड (Fish Farming) वाड्रफनगर के ग्राम हरिगंवा निवासी मुन्नालाल गोलदार ने मत्स्य पालन (Fisheries) को अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।

पारंपरिक खेती से सीमित आय अर्जित करने वाले मुन्नालाल ने मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन में शासन की योजनाओं का लाभ लेकर हरिगंवा जलाशय को पट्टे/लीज पर लेकर आधुनिक मत्स्य पालन व्यवसाय शुरू किया।

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उन्होंने सघन मत्स्य पालन तकनीक (Intensive Fish Farming) अपनाते हुए रोहू, कतला, मृगल और कॉमन कार्प जैसी उन्नत प्रजातियों का पालन किया। सतत प्रयास और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। इस व्यवसाय में उनके परिवार का सक्रिय सहयोग भी शामिल है, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

मुन्नालाल का कहना है कि स्थानीय बाजार (Fish Farming) में मछलियों की निरंतर मांग होने के कारण उनकी उपज आसानी से बिक जाती है और वे इस व्यवसाय से संतुष्ट एवं खुश हैं। भविष्य में वे अपने तालाब के समीप कुक्कुट शेड स्थापित कर आय के स्रोतों को और अधिक बढ़ाने की योजना बना रहे हैं (मत्स्य पालन)।

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मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य शासन मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए किसानों और मछुआरों को तालाब निर्माण, आवश्यक उपकरण, परिपूरक आहार और मत्स्य बीज हेतु अनुदान प्रदान कर रहा है। इन योजनाओं का लाभ उठाकर मुन्नालाल जैसे प्रगतिशील किसानों ने जिले में मत्स्य पालन को लाभकारी और स्थायी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है।

शासन के लाभकारी उपाय

तालाब निर्माण और पट्टे/लीज पर जलाशय प्राप्ति

मत्स्य बीज और परिपूरक आहार के लिए अनुदान

आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण

व्यवसायिक सफलता और आय

सालाना 2 लाख रुपये शुद्ध लाभ

परिवार और स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार

भविष्य में कुक्कुट पालन से आय में वृद्धि

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Fish Farming अन्य किसानों को किया प्रेरित

मुन्नालाल की सफलता ने जिले के अन्य किसानों को भी मत्स्य पालन (Fish Farming) अपनाने के लिए प्रेरित किया है। उनका उदाहरण दिखाता है कि राज्य शासन की योजनाओं का सही उपयोग कर ग्रामीण किसान आर्थिक रूप से सक्षम, स्वरोजगार समर्थ और सामाजिक रूप से सम्मानित बन सकते हैं।

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