EPFO New Rules : कर्मचारी भविष्य निधि (Provident Fund – PF) से पैसा निकालना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने PF निकासी से जुड़े नियमों को सरल और एकरूप (EPFO New Rules) बना दिया है, जिससे कर्मचारियों को जरूरत के समय अपने ही पैसे तक पहुंचने में अब कम दिक्कत होगी।
मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, शादी, घर खरीदने या बेरोजगारी (EPFO New Rules) जैसी स्थितियों में PF निकालने के नियम जानना अब हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए जरूरी हो गया है।
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पहले PF निकासी क्यों थी इतनी जटिल?
अब तक PF से पैसा निकालना कई कर्मचारियों के लिए उलझन भरा रहा है। अलग-अलग कारणों के लिए अलग-अलग नियम और पात्रता अवधि तय थी। कहीं 2 साल की सेवा जरूरी थी तो कहीं 7 साल की। इसी वजह से ज्यादातर कर्मचारियों को यह समझ ही नहीं आता था कि वे किस नियम के तहत क्लेम कर सकते हैं।
इसके अलावा, अधिकतर मामलों में केवल कर्मचारी के अपने योगदान और उस पर मिलने वाले ब्याज (EPFO New Rules) की ही निकासी की अनुमति थी। वह भी 50% से 100% तक सीमित रहती थी, जिससे आपात स्थिति में भी पूरा पैसा निकालना मुश्किल हो जाता था।
EPFO के नए नियमों में क्या बड़ा बदलाव हुआ है?
EPFO ने पिछले साल अक्टूबर के अंत में सभी आंशिक PF निकासी नियमों को एक ही फ्रेमवर्क में शामिल कर दिया है।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लगभग सभी प्रकार की निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि सिर्फ 12 महीने रखी गई है।
दूसरा अहम बदलाव यह है कि अब निकासी में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान तथा उस पर मिलने वाला ब्याज शामिल होगा। यानी अब कुल पात्र PF बैलेंस का 75% तक निकाला जा सकता है। पहले की तुलना में यह कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
100% PF बैलेंस कब निकाल सकते हैं?
12 महीने की सेवा पूरी होने के बाद कुछ विशेष परिस्थितियों में पूरा पात्र PF बैलेंस निकाला जा सकता है—
मेडिकल इलाज: स्वयं या परिवार के इलाज के लिए एक वित्त वर्ष में अधिकतम तीन बार PF (EPFO New Rules) निकासी की अनुमति।
शिक्षा: स्वयं या बच्चों की पढ़ाई के लिए पूरी मेंबरशिप अवधि में अधिकतम 10 बार निकासी।
शादी: स्वयं या बच्चों की शादी के लिए मेंबरशिप अवधि में अधिकतम पांच बार निकासी।
घर से जुड़ी जरूरतें: घर खरीदने, निर्माण, होम लोन चुकाने या मरम्मत के लिए अधिकतम पांच बार निकासी।
विशेष परिस्थितियां: ऐसी जरूरतें, जिनमें कोई विशेष कारण बताना अनिवार्य नहीं है। इसमें एक वित्त वर्ष में अधिकतम दो बार पैसा निकाला जा सकता है।
25% PF राशि क्यों रोकी गई है?
EPFO ने नियमों को आसान बनाने के साथ-साथ रिटायरमेंट सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया है। आंकड़ों से पता चला कि बार-बार PF निकासी के कारण कर्मचारियों की लंबी अवधि की बचत कमजोर हो रही थी।
कई मामलों में अंतिम सेटलमेंट के समय आधे से ज्यादा PF खातों में ₹20,000 से भी कम राशि (EPFO New Rules) बची थी। करीब 75% खातों में ₹50,000 से कम बैलेंस पाया गया। इससे कर्मचारी 8.25% की कंपाउंडिंग का लाभ नहीं उठा पाए।
इसी वजह से EPFO ने 25% PF बैलेंस को सुरक्षित रखना अनिवार्य किया है, ताकि रिटायरमेंट के समय कुछ रकम जरूर उपलब्ध रहे।
नौकरी छूटने पर PF निकासी के नियम
यदि किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो वह तुरंत PF बैलेंस का 75% निकाल (EPFO New Rules) सकता है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान और ब्याज शामिल होता है। शेष 25% राशि एक साल बाद निकाली जा सकती है।
कुछ विशेष परिस्थितियों में पूरा PF बैलेंस भी निकाला जा सकता है, जैसे—
55 वर्ष की आयु के बाद रिटायरमेंट, स्थायी विकलांगता, रिट्रेंचमेंट, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या स्थायी रूप से विदेश जाना।
क्या इन नियमों का पेंशन पर असर पड़ेगा?
इन बदलावों का Employees’ Pension Scheme (EPS) पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। मासिक पेंशन (EPFO New Rules) पाने के लिए कम से कम 10 साल की सेवा अनिवार्य है।
हालांकि, 10 साल पूरे होने से पहले यदि पेंशन की राशि निकाल ली जाती है, तो भविष्य की पेंशन का अधिकार समाप्त हो जाता है। यदि पेंशन राशि नहीं निकाली जाती, तो योगदान बंद होने के बाद भी मृत्यु की स्थिति में परिवार को तीन साल तक पेंशन का लाभ मिलता है। एक बार निकासी करने पर यह सुरक्षा खत्म हो जाती है।










