झारखंड के हजारीबाग जिले में जंगली हाथियों (Elephant Attack Tragedy) के हमले ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर सामने ला दी है। देर रात गोंदवार गांव में घुसे हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया, जिसमें छह ग्रामीणों की दर्दनाक मौत हो गई। इस भयावह घटना को स्थानीय लोग अब हाथी हमला घटना के रूप में याद कर रहे हैं, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
Elephant Attack Tragedy झुंड जंगल से निकलकर सीधे बस्ती में पहुंचा
जानकारी के अनुसार, अंधेरा होते ही हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर सीधे बस्ती में पहुंच गया। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों ने सबसे पहले कच्चे घरों को निशाना बनाया और दीवारें तोड़नी शुरू कर दीं। अचानक हुए हमले से लोग संभल नहीं पाए। जो ग्रामीण समय रहते भागने में सफल नहीं हुए, वे हाथियों के हमले में कुचल गए। इस दर्दनाक जंगली हाथी हमला (Elephant Attack Tragedy) में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक घायल व्यक्ति ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
सबसे हृदयविदारक दृश्य उस परिवार का था, जहां एक ही घर से चार अर्थियां उठीं। बताया जा रहा है कि पूरे परिवार में सिर्फ एक बुजुर्ग महिला ही जीवित बच सकीं। गांव में हर तरफ मातम पसरा हुआ है और लोग रात होते ही भय के साए में जीने को मजबूर हैं। घटना के बाद ग्रामीण लगातार पहरा दे रहे हैं, क्योंकि उन्हें दोबारा हाथियों के झुंड की वापसी (Elephant Attack Tragedy) का डर सता रहा है।
हाथियों की आवाजाही वाला इलाका
हजारीबाग ईस्ट फॉरेस्ट डिवीजन के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर विकास कुमार उज्ज्वल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह क्षेत्र पहले से ही हाथियों की आवाजाही वाला इलाका रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से जंगल की ओर न जाने और सतर्क रहने की अपील की। वन विभाग की टीमें लगातार इलाके में गश्त कर रही हैं और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को चेतावनी दी जा रही है। प्रशासन इस पूरी स्थिति को वन्यजीव-मानव संघर्ष (Elephant Attack Tragedy) के संवेदनशील मामले के रूप में देख रहा है।
हालात का लिया जायजा
घटना की सूचना मिलते ही सब-डिविजनल ऑफिसर आदित्य पांडे मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने इसे अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि मृतकों के परिजनों को शासन के नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। वहीं स्थानीय विधायक निर्मल महतो ने भी पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की और वन विभाग की तैयारी पर सवाल उठाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में हाथियों का खतरा पहले भी कई बार सामने आ चुका है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। ग्रामीणों ने मांग की है कि हाथियों की आवाजाही रोकने और गांवों की सुरक्षा के लिए मजबूत रणनीति बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं और जनहानि (Elephant Attack Tragedy) दोबारा न हो।
इस घटना ने एक बार फिर इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के सिकुड़ने और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण ऐसे हादसे लगातार बढ़ रहे हैं, जिनके समाधान के लिए दीर्घकालिक नीति जरूरी है।

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