Crusher Expansion : आर्यन मिनरल्स के क्रशर विस्तार पर विरोध तेज, मंत्री-विधायक की चुप्पी पर सवाल

कटंगपाली-साल्हेओना क्षेत्र में संचालित जम्बो क्रशर उद्योग के विस्तार की तैयारी ने एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स जोतपुर द्वारा उत्पादन क्षमता दोगुनी करने की योजना को लेकर जनसुनवाई प्रस्तावित है, लेकिन मंत्री और विधायक की चुप्पी के बीच ग्रामीणों में विरोध की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

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Crusher Expansion
Highlights
  • क्रशर विस्तार की जनसुनवाई की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों में विरोध की तैयारी
  • धूल, डस्ट और ध्वनि प्रदूषण से पहले ही परेशान ग्रामीण, मंत्री-विधायक की भूमिका पर सवाल
  • उत्पादन क्षमता एक लाख टन से बढ़कर दो लाख टन से अधिक करने की तैयारी

Baramkela News : कटंगपाली-साल्हेओना क्षेत्र में खनन और क्रशर उद्योगों (Crusher Expansion) की बढ़ती गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अब क्षेत्र में जम्बो क्रशर के नाम से पहचाने जाने वाले आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स जोतपुर द्वारा क्रशर विस्तार की योजना सामने आने के बाद लोगों के बीच नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।

इस विस्तार प्रक्रिया के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने हेतु प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह क्रशर विस्तार लागू होता है तो पहले से मौजूद समस्याएं और भी गंभीर हो जाएंगी।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में पहले से ही चल रहे क्रशर उद्योगों के कारण हवा में धूल-डस्ट, सड़क की बदहाली और ध्वनि प्रदूषण से जीवन मुश्किल हो चुका है। इसके बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रस्तावित क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) से किसानों की खेती, बच्चों की पढ़ाई और आम लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ेगा।

स्थापना के समय भी हुआ था विरोध

तहसील सरिया के अंतर्गत जोतपुर, बोंदा और दुलमपुर गांवों के मध्य संचालित आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स की स्थापना के समय भी स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध किया था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय भी उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए अधिकारियों ने अनुमति दे दी थी। अब एक बार फिर उसी उद्योग के क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) की तैयारी ने पुराने विवाद को फिर से जिंदा कर दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस खसरा नंबर की भूमि पर लीज स्वीकृत की गई है, उसी क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। मौजूदा स्थिति में जहां उत्पादन क्षमता लगभग एक लाख टन प्रतिवर्ष है, वहीं प्रस्तावित क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) के बाद इसे बढ़ाकर लगभग 2,00,198 टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

उत्पादन दोगुना, मुनाफा दोगुना Crusher Expansion

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) का सीधा लाभ उद्योग संचालक को होगा, लेकिन इसके दुष्परिणाम किसानों और ग्रामीणों को झेलने पड़ेंगे। पहले से ही क्रशर के कारण उड़ने वाली धूल-डस्ट से धान की फसल प्रभावित हो रही है। खेतों में उत्पादन कम होने की शिकायत लगातार सामने आ रही है।

दिन-रात क्रशर चलने से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) लागू हो जाता है तो धूल और ध्वनि प्रदूषण का स्तर दोगुना हो जाएगा। इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

खनिज पट्टे और सीएसआर पर भी सवाल

आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स को वर्ष 2017 में लगभग 5 हेक्टेयर भूमि पर डोलोमाइट खनन की लीज दी गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि इतने वर्षों में इस खनन पट्टे से कितना उत्पादन हुआ और क्षेत्र के विकास के लिए सीएसआर मद से कितना काम हुआ, इसकी कोई पारदर्शी जानकारी सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) की प्रक्रिया शुरू करने से पहले प्रशासन को पिछले वर्षों के खनन और सामाजिक दायित्वों की जांच करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा न होने से लोगों में अविश्वास बढ़ रहा है।

अवैध खदानों से पत्थर खरीदने के आरोप

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि आसपास के कई अवैध डोलोमाइट खदानों से पत्थर खरीदकर क्रशर में उपयोग किया जाता है, जिससे शासन को राजस्व की क्षति हो रही है। यदि प्रस्तावित क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) लागू होता है तो इस प्रकार की गतिविधियों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से मौजूद अनियमितताओं की जांच किए बिना विस्तार की अनुमति देना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

 

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इन खसरा नंबरों पर खनन की अनुमति

जोतपुर, दुलमपुर और मौहापाली गांवों में खसरा नंबर 160/1क, 160/1ख, 160/1ग, 160/1घ, 160/1ड, 160/1च, 160/1छ, 160/2क, 160/2ख, 160/2ग, 160/2घ, 160/2ड, 16789/20, 16789/21, 16789/23, 16789/35, 16789/36, 16789/37, 16789/55, 106/9, 106/11, 106/13, 106/14, 106/15, 106/16, 106/17, 106/24 और 106/25 कुल लगभग 4.961 हेक्टेयर भूमि पर इस क्रशर संस्थान को लीज स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इन क्षेत्रों में प्रस्तावित क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) से निजी और शासकीय दोनों प्रकार की भूमि प्रभावित होगी।

पहले से ही मुसीबत में क्षेत्र के लोग

साल्हेओना, कटंगपाली, छेलफोरा और नौघटा सहित आसपास के कई गांवों में संचालित क्रशर उद्योगों के कारण सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। भारी वाहनों की आवाजाही से धूल का गुबार लगातार उड़ता रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे हालात में एक और क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) क्षेत्र के पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसके बावजूद मंत्री और विधायक द्वारा इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट पहल न करना भी चर्चा का विषय बन गया है।

स्कूल और छात्रावास सबसे ज्यादा प्रभावित

इस क्रशर संस्थान के सबसे नजदीक बोंदा पंचायत का सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल, मिडिल स्कूल और बालक-बालिका छात्रावास स्थित है। यह संस्थान क्रशर से महज लगभग 200 मीटर की दूरी पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्रशर से उड़ने वाली धूल सीधे इन स्कूलों तक पहुंचती है। खिड़कियों और रोशनदानों से होकर कक्षाओं में धूल की परत जम जाती है। यदि क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) होता है तो बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर और गंभीर असर पड़ सकता है। पेड़-पौधे तक सफेद धूल की परत से ढके दिखाई देते हैं, जो पर्यावरणीय संकट की ओर इशारा करते हैं।

Crusher Expansion ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

दुलमपुर के किसान मधुसूदन पटेल का कहना है कि उनके पास लगभग तीन एकड़ खेत है, जिसमें दोहरी धान की फसल लगाई जाती है। क्रशर से उड़ने वाली धूल पहले ही फसल को नुकसान पहुंचा रही है। यदि क्रशर विस्तार (Crusher Expansion) लागू हो जाता है तो उत्पादन में और कमी आ सकती है। वहीं बोंदा पंचायत के सरपंच गोवर्धन निषाद का कहना है कि क्रशर की स्थापना के समय भी ग्रामीणों ने विरोध किया था, लेकिन अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी। अब विस्तार की प्रक्रिया शुरू होने पर ग्रामीण एकजुट होकर विरोध करेंगे।

 

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