Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ में पारंपरिक धान खेती (Brahmi Farming Chhattisgarh) के साथ अब किसान वैकल्पिक और लाभकारी फसलों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। बदलते कृषि परिदृश्य में औषधीय फसलों की खेती किसानों के लिए नई आर्थिक संभावनाएं लेकर सामने आई है।
इसी कड़ी में ब्राम्ही की खेती किसानों के लिए आय का नया और भरोसेमंद माध्यम बनकर उभर रही है। कम लागत, लगातार मांग और सुनिश्चित बाजार व्यवस्था के कारण किसान अब धान के साथ-साथ औषधीय खेती को अपनाने लगे हैं।

ब्राम्ही एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं, स्मरण शक्ति बढ़ाने वाली औषधियों, मानसिक स्वास्थ्य सुधार उत्पादों तथा सौंदर्य प्रसाधनों में व्यापक रूप से किया जाता है। यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है और किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है।

राज्य में ब्राम्ही की खेती (Brahmi Farming Chhattisgarh) को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ विपणन सहायता भी उपलब्ध हो रही है।
Brahmi Farming Chhattisgarh औषधीय फसलों की ओर प्रेरित
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की योजनाओं के तहत किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर औषधीय फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है। राज्य के कई जिलों में किसान अब धान के स्थान पर या उसके साथ ब्राम्ही की खेती अपनाने लगे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ब्राम्ही की खेती (Brahmi Farming Chhattisgarh) कम जोखिम वाली खेती मानी जा रही है, क्योंकि इसकी लागत सीमित और बाजार स्थिर है।

कम लागत, लंबे समय तक उत्पादन
ब्राम्ही की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक बार रोपण करने के बाद 3 से 4 वर्षों तक हर तीन माह में इसकी कटाई की जा सकती है। इससे किसानों को बार-बार बुवाई का खर्च नहीं उठाना पड़ता। जहां धान की खेती में पानी, खाद और श्रम लागत अधिक होती है, वहीं ब्राम्ही में अपेक्षाकृत कम संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है। इसी कारण ब्राम्ही की खेती (Brahmi Farming Chhattisgarh) किसानों के लिए टिकाऊ और लाभकारी विकल्प बनती जा रही है।
एक एकड़ में लाखों की आय की संभावना
कृषि विभाग और बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार ब्राम्ही की खेती में सालाना लागत लगभग 21 हजार रुपये तक आती है। एक वर्ष में करीब 30 क्विंटल उत्पादन होने पर किसानों को लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये तक आय प्राप्त हो सकती है। इस प्रकार शुद्ध लाभ करीब 1 लाख 20 हजार रुपये तक पहुंच रहा है। यही आर्थिक लाभ किसानों को ब्राम्ही की खेती की ओर आकर्षित कर रहा है।

बाजार की चिंता खत्म, Buy Back व्यवस्था
किसानों की सबसे बड़ी समस्या फसल बेचने की होती है, लेकिन ब्राम्ही के मामले में यह चिंता काफी हद तक समाप्त हो गई है। औषधि पादप बोर्ड द्वारा किसानों को रोपण सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्रय अनुबंध (Buy Back) की सुविधा भी दी जा रही है। इससे किसानों को पहले से ही बाजार सुनिश्चित मिल जाता है और उन्हें मूल्य गिरने का जोखिम नहीं रहता। ब्राम्ही की खेती का यही मॉडल किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
रायपुर और धमतरी में सफल प्रयोग
वर्तमान में रायपुर और धमतरी जिलों के लगभग 36 किसान करीब 15 एकड़ क्षेत्र में सफलतापूर्वक ब्राम्ही की खेती कर रहे हैं। स्थानीय जलवायु और भूमि इसकी खेती के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। यह फसल नमी एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उग जाती है, जहां अन्य फसलें नुकसान झेलती हैं। इसलिए ब्राम्ही की खेती को जल संरक्षण और फसल विविधीकरण दोनों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार औषधीय पौधों की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, रोपण सामग्री और विपणन सहयोग देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार भी फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, जिससे ब्राम्ही की खेती (Brahmi Farming Chhattisgarh) भविष्य में बड़े कृषि मॉडल के रूप में उभर सकती है।
औषधीय खेती में छत्तीसगढ़ की बढ़ती पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ औषधीय खेती के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। ब्राम्ही सहित अन्य औषधीय पौधों की मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में बढ़ रही है। इससे किसानों को स्थायी आय का स्रोत मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

बदलते समय के साथ किसान भी नई सोच अपना रहे हैं। धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए अब वे ऐसी फसलों को चुन रहे हैं, जो कम लागत में अधिक लाभ दें और बाजार में स्थिर मांग बनाए रखें। इसी बदलाव की मिसाल बन रही है ब्राम्ही की खेती (Brahmi Farming Chhattisgarh), जो किसानों को आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की दिशा दिखा रही है।

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