Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों ‘ट्रांसफर-पोस्टिंग’ (Chhattisgarh IAS Transfer Controversy) का खेल किसी सर्कस से कम नजर नहीं आ रहा है। राज्य सरकार ने शुक्रवार को आईएएस अधिकारियों के तबादले की जो नई सूची जारी की, उसने न केवल नौकरशाही को हैरत में डाल दिया, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की क्षमता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल कोरिया जिले की कलेक्टरी (Chhattisgarh IAS Transfer Controversy) को लेकर खड़ा हुआ है। महज 48 घंटे पहले जिस पुष्पा साहू (सचिव, माध्यमिक शिक्षा मंडल) को कोरिया का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया था, उन्हें ज्वाइनिंग की दहलीज लांघने से पहले ही ‘दूध की मक्खी’ की तरह निकाल फेंका गया। सरकार ने 6 मई 2026 को जारी अपने ही आदेश को जिस हड़बड़ी में संशोधित किया, वह यह बताने के लिए काफी है कि सत्ता के गलियारों में समन्वय का कितना अभाव है। आखिर दो दिनों के भीतर ऐसा क्या ‘अदृश्य दबाव’ या ‘बड़ा कारण’ सामने आ गया कि मुख्यमंत्री और सामान्य प्रशासन विभाग को अपने ही फैसले से पीछे हटना पड़ा?
नौकरशाही के मनोबल पर चोट
जब सरकार किसी अधिकारी को जिले की कमान सौंपती है और फिर बिना किसी तार्किक कारण के उसे वापस बुला लेती है, तो यह सीधे तौर पर उस अधिकारी (Chhattisgarh IAS Transfer Controversy) के मनोबल और सरकार की प्रशासनिक गंभीरता पर प्रहार है। 2016 बैच की आईएएस रोक्तिमा यादव को कोरिया की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, लेकिन क्या गारंटी है कि वे भी सरकार के अगले ‘यू टर्न’ का शिकार नहीं होंगी?
रीता यादव को दोहरी जिम्मेदारी, पर स्थिरता कहां
इसी आदेश में 2019 बैच की आईएएस रीता यादव को आयुक्त, उच्च शिक्षा के साथ राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में एक के बाद एक प्रयोग और बिना विचार किए गए तबादले यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकार के पास विजन की कमी है।
प्रशासन या प्रयोगशाला Chhattisgarh IAS Transfer Controversy
राज्य की जनता यह जानना चाहती है कि क्या मंत्रालय सिर्फ आदेश जारी करने और उसे वापस लेने की प्रयोगशाला बन गया है? कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद को लेकर की जा रही यह लुका-छिपी प्रशासनिक (Chhattisgarh IAS Transfer Controversy) अराजकता का संकेत है। सरकार को यह समझना होगा कि बार-बार के संशोधनों से अधिकारियों का भरोसा डगमगाता है और जनता के बीच सरकार की छवि एक ‘अनिश्चित सरकार’ की बनती है। कोरिया कलेक्टर की नियुक्ति में यह यू-टर्न सरकार की प्रशासनिक अपरिपक्वता का जीता-जागता प्रमाण है।

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