Baramkela News : छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के अंतर्गत तहसील सरिया का कटंगपाली-साल्हेओना (Dolomite Dust) क्षेत्र इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है। यहां संवैधानिक अधिकारों और धरातल की खौफनाक हकीकत के बीच एक भीषण जंग छिड़ गई है। क्षेत्र में संचालित रसूखदार क्रशर संस्थानों और डोलोमाइट खदानों के संचालकों ने सीधे तौर पर ग्राम सभा को चुनौती दे दी है।
ग्राम पंचायत कटंगपाली-अ ने ग्रामवासियों की जान बचाने के लिए ग्राम सभा में जो प्रस्ताव पारित किया था, उसे इन संचालकों ने रद्दी का टुकड़ा समझकर ठेंगा दिखा दिया है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि यहां (Dolomite Dust) अब चुनी हुई सरकार या कानून का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर खदान माफियाओं का राज चल रहा है।
ग्राम सभा के प्रस्ताव की उड़ी धज्जियां
तहसील सरिया के इस औद्योगिक बेल्ट में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाना एक आम बात हो गई है। ग्राम पंचायत कटंगपाली-अ द्वारा आयोजित ग्राम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि क्षेत्र में उड़ती जानलेवा धूल को काबू करने के लिए सभी खदान और क्रशर संचालक नियमित पानी का छिड़काव करेंगे।
इस संबंध में बाकायदा लिखित सूचना भी सभी संचालकों को तामील कराई गई थी। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इस सूचना के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी यहां (Dolomite Dust) पानी का छिड़काव शुरू नहीं हो सका है। संचालकों के इस अड़ियल और तानाशाही रवैये ने पंचायत पदाधिकारियों और ग्रामीणों के भीतर आक्रोश की ज्वाला भड़का दी है।
माफियाओं के खिलाफ सीधी जंग Dolomite Dust
क्रशर और खदान संचालकों के इस अहंकारी रवैये से बिफरी सरपंच पुष्पा मिरी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि इस क्षेत्र में सालों से क्रशर उद्योग चलाए जा रहे हैं, लेकिन इनका संचालन पूरी तरह से अवैध और पर्यावरण व खनिज नियमों के विपरीत है। सरपंच मिरी के अनुसार, इन संचालकों की मनमानी की शिकायतें तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार की गई, मगर अब तक प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
इसी अनदेखी का फायदा उठाते हुए संचालकों ने यहां (Dolomite Dust) आतंक मचा रखा है। सरपंच ने बताया कि 14 अप्रैल को आयोजित ग्राम सभा में यह स्पष्ट किया गया था कि यदि पानी का छिड़काव नहीं हुआ, तो संबंधित विभागों से इन खदानों को बंद करने की अनुशंसा की जाएगी। इसके बावजूद संचालकों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। आज स्थिति यह है कि सड़कों और गली-मोहल्लों में उड़ती धूल से दिन में भी ‘सफेद अंधेरा’ छाने लगा है।
बलगम में निकल रहा है गर्दा Dolomite Dust
कटंगपाली और साल्हेओना गांव के घरों, आंगनों और उपजाऊ खेतों में डस्ट (Dolomite Dust) की मोटी परतें जम गई हैं। यह सिर्फ धूल नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के लिए ‘सफेद मौत’ है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि सुबह उठने के बाद जब वे कुल्ला करते हैं, तो उनके बलगम में भारी मात्रा में धूल और गर्दा निकलता है। यह स्थिति बेहद भयावह है और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का संकेत दे रही है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है। गांव (Dolomite Dust) के लोग अब अपने ही घर में घुट-घुट कर मरने को मजबूर हैं, क्योंकि बाहर निकलते ही जहरीली हवा उनका स्वागत करती है।
उप सरपंच और ग्रामीणों ने मांगा हिसाब
कटंगपाली-अ के उप सरपंच मकुंद मिरी सहित दर्जनों ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि सड़कों और क्रशर परिसर के आसपास नियमित पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीणों ने आधुनिक स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने और धूल नियंत्रण के अन्य वैज्ञानिक उपाय तुरंत शुरू करने की मांग की है। उप सरपंच का कहना है कि यदि प्रशासन ने सात दिनों के भीतर इन संस्थानों पर सख्ती नहीं दिखाई और डस्ट (Dolomite Dust) पर लगाम नहीं लगाई, तो ग्रामीण उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम के लिए मजबूर होंगे।
रसूखदार संस्थानों की लंबी फेहरिस्त
कटंगपाली क्षेत्र में लंबे समय से संचालित उद्योगों में हर्ष मिनरल्स, पुष्पा मिनरल्स, जय दुर्गा क्रशर, मां बंजारी मिनरल्स, ओम साई मिनरल्स, बालाजी एंड माइन्स मिनरल्स, सदगुरु मिनरल्स और आराधना मिनरल्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं। वहीं डोलोमाइट खदानों में शुभ मिनरल्स (बिलाईगढ़), ममहमिया मिनरल्स (साल्हेओना), आराधना मिनरल्स और पीला बाबू पटेल का नाम सुर्खियों में है। साल्हेओना क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ मिनरल्स, महमिया मिनरल्स, नवदुर्गा क्रशर, बाबा बैद्यनाथ मिनरल्स, अग्रोहा मिनरल्स और सालासर इंटरप्राइजेज जैसे संस्थान इस डस्ट (Dolomite Dust) के तांडव में बराबर के हिस्सेदार हैं।
माफिया से साठगांठ का शक
जब ग्राम पंचायत चिल्ला-चिल्ला कर अपनी समस्या बता रही है, तब खनिज विभाग और पर्यावरण मंडल का मौन रहना कई सवाल खड़े करता है। क्या यहां (Dolomite Dust) के अधिकारियों ने संचालकों के रसूख के आगे घुटने टेक दिए हैं? सरपंच पुष्पा मिरी का कहना है कि अब कागजी लड़ाई का समय खत्म हो चुका है। ग्राम सभा के प्रस्ताव का अपमान करना यानी सीधे तौर पर जनता के आदेश का अपमान है।
आज पूरा साल्हेओना क्षेत्र इस जानलेवा डस्ट (Dolomite Dust) के कारण नरक बन चुका है। ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उनका कहना है कि वे इन माफियाओं को अपनी जान से खेलने की इजाजत और ज्यादा नहीं देंगे। यदि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो कटंगपाली की यह चिंगारी पूरे सरिया क्षेत्र में जनांदोलन की आग बन सकती है।

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