Balrampur Road News : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज (Bhawarmala Village Road Issues) जिले से विकास के बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। रामानुजगंज जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम भवरमाला के ग्रामीण आज भी सड़क की बदहाली (Dilapidated Road Conditions) के कारण आदिम युग जैसी समस्याओं से जूझने को मजबूर हैं। इस गांव तक पहुंचना आज भी किसी चुनौती से कम नहीं है। खराब और जर्जर सड़क के कारण यहां के निवासियों को वर्षों से शारीरिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, लेकिन इसका सबसे मर्मस्पर्शी और गंभीर असर छोटे स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है।
नन्हे कंधों पर भारी बस्ता और जर्जर रास्तों की मार
भवरमाला गांव के बच्चे रोज़ाना उज्ज्वल भविष्य के सपने लेकर मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल की ओर निकलते हैं। लेकिन स्कूल पहुँचने की उनकी यह राह कांटों भरी है। सड़क की बदहाली (Dilapidated Road Conditions) का आलम यह है कि जो दूरी सामान्य तौर पर 10-15 मिनट में पूरी होनी चाहिए, उसे तय करने में इन बच्चों को 40 मिनट से भी अधिक का समय लग जाता है। सुबह-सुबह भारी स्कूल बैग लेकर निकलने वाले ये नन्हे बच्चे रास्ते भर बस के झटकों और उड़ती धूल से जूझते हैं। उबड़-खाबड़ रास्ता न केवल थकाऊ है, बल्कि कई स्थानों पर इतना संकरा है कि वहां से गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं होता।
बरसात में बढ़ जाती है मुसीबत Bhawarmala Village Road Issues
सामान्य दिनों में तो बच्चे धूल फांकते हुए स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन मानसून के दौरान हालात नारकीय हो जाते हैं। बारिश के दिनों में सड़क की बदहाली (Dilapidated Road Conditions) के चलते पूरा रास्ता कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बच्चे कीचड़ में फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे उनके कपड़े और किताबें खराब हो जाती हैं और उन्हें आधे रास्ते से ही घर वापस लौटना पड़ता है। यह स्थिति न केवल उनकी सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि उनकी नियमित पढ़ाई को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
दो मार्ग, पर दोनों ही बेहाल Bhawarmala Village Road Issues
रामानुजगंज से भवरमाला पहुंचने के लिए मुख्य रूप से दो रास्तों का उपयोग किया जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि दोनों ही मार्गों पर सड़क की बदहाली (Dilapidated Road Conditions) का साया है:
अरागाही मार्ग : यह रास्ता मुख्य मार्ग होने के बावजूद पूरी तरह से उखड़ चुका है और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गया है।
पुराना वन डिपो मार्ग : दूसरा रास्ता कमलपुर और केरवासिला होकर जाता है, जो न केवल संकरा है बल्कि कच्चा होने के कारण वाहनों के चलने लायक नहीं बचा है।
इन दोनों रास्तों की बदहाली ने ग्रामीणों और खासकर बीमारों व गर्भवती महिलाओं के लिए अस्पताल पहुंचना भी दूभर कर दिया है।
बच्चों की मार्मिक अपील और प्रशासनिक चुप्पी
अब तक बड़ों की गुहार अनसुनी रहने के बाद, गांव के छोटे-छोटे बच्चे खुद अपनी व्यथा सुनाने सामने आए हैं। मासूम चेहरों पर डर और उम्मीद लिए इन बच्चों का कहना है— “हमें अच्छी सड़क दे दीजिए, ताकि हम समय पर और सुरक्षित स्कूल पहुंच सकें।” बच्चों की यह मासूम गुहार इस बात का प्रमाण है कि सड़क की बदहाली (Dilapidated Road Conditions) ने उनके बचपन को कितना प्रभावित किया है।
ग्रामीणों का आक्रोश अब फूटने लगा है। उनका कहना है कि यह सिर्फ डामर और गिट्टी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उनके बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा सवाल है। यदि प्रशासन जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो आने वाले समय में ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
विकास की बाट जोहता भवरमाला Bhawarmala Village Road Issues
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने कई बार मंचों से इस सड़क को बनाने का आश्वासन दिया, लेकिन आज तक एक भी पत्थर यहाँ नहीं लगा है। स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की इस उदासीनता ने भवरमाला को मुख्यधारा से काट कर रख दिया है। अब देखना यह होगा कि सड़क की बदहाली (Dilapidated Road Conditions) से परेशान इन मासूम बच्चों की गुहार शासन के कानों तक कब पहुंचती है और कब इन नन्हें कदमों को चलने के लिए एक चिकनी और सुरक्षित राह नसीब होती है।

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