Chhattisgarh Electricity News : छत्तीसगढ़ में चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी (Chhattisgarh Electricity Tariff Hike) की शुरुआत से ठीक पहले प्रदेशवासियों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही बिजली की दरों (टैरिफ) में बड़ा बदलाव (Electricity Tariff Hike) होना लगभग तय माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) द्वारा प्रस्तुत किए गए वित्तीय लेखा-जोखा और घाटे के आंकड़ों के आधार पर राज्य विद्युत नियामक आयोग अंतिम निर्णय लेने की प्रक्रिया में है।
घाटे की भरपाई का भारी दबाव Chhattisgarh Electricity Tariff Hike
विद्युत वितरण कंपनी ने इस बार नियामक आयोग के समक्ष लगभग 7000 करोड़ रुपए का भारी-भरकम राजस्व घाटा प्रदर्शित किया है। इस घाटे की भरपाई के लिए कंपनी ने शुरुआती प्रस्ताव में बिजली दरों में 24 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि की मांग की थी। हालांकि, हाल ही में संपन्न हुई जनसुनवाई में उपभोक्ताओं, उद्योगपतियों और विभिन्न संगठनों के कड़े विरोध के बाद आयोग इस वृद्धि को 5 से 6 प्रतिशत के बीच सीमित रखने की योजना बना रहा है। सूत्रों का कहना है कि अगले सप्ताह जारी होने वाले नए आदेश में प्रति यूनिट औसतन 20 से 25 पैसे की बढ़ोतरी (Electricity Tariff Hike) की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
घरेलू उपभोक्ताओं पर ‘करंट’ का ज्यादा असर
प्रदेश के कुल 60 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं में से 48 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं। नियामक आयोग की वर्तमान रणनीति के अनुसार, इस बार निम्न दाब (Low Tension) यानी घरेलू और छोटे व्यावसायिक कनेक्शनों पर अधिक भार पड़ सकता है। मध्यम वर्ग, जो पहले से ही महंगाई की मार झेल रहा है, उसके लिए गर्मियों में एसी और कूलर का उपयोग अब और महंगा हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि स्लैब के अनुसार दरें बढ़ने से मासिक बिल में 10 से 15 प्रतिशत तक का उछाल देखा जा सकता है।
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औद्योगिक और कृषि क्षेत्र की स्थिति Electricity Tariff Hike
उच्च दाब (High Tension) वाले उपभोक्ताओं, जिनमें बड़े उद्योग और स्टील प्लांट शामिल हैं, के लिए आयोग एक संतुलित रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है ताकि प्रदेश के औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। वहीं, प्रदेश के करीब 8 लाख कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए भी सब्सिडी और दरों के बीच सामंजस्य बिठाने की चुनौती है। औद्योगिक संगठनों ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि बिजली की दरों में अनियंत्रित वृद्धि (Electricity Tariff Hike) की गई, तो प्रदेश के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कम हो जाएगी।
पिछले वर्षों का तुलनात्मक विश्लेषण
यह पहली बार नहीं है जब प्रदेश की जनता पर इस तरह का बोझ डाला जा रहा है। यदि पिछले आंकड़ों पर गौर करें, तो पिछले वर्ष भी औसत 13 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद जून 2024 में भी नियामक आयोग ने 20 पैसे की दरें बढ़ाई थीं। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी (Electricity Tariff Hike) के पीछे कोयले की बढ़ती कीमतें, पावर प्लांट के रखरखाव का खर्च और वितरण के दौरान होने वाले तकनीकी नुकसान (AT&C Loss) को मुख्य कारण बताया जा रहा है।
वर्तमान टैरिफ संरचना पर एक नजर
वर्तमान में प्रदेश में लागू स्लैब कुछ इस प्रकार हैं, जिनमें संशोधन के बाद बदलाव देखने को मिलेगा
0-100 यूनिट: 4.10 रुपए प्रति यूनिट
101-200 यूनिट: 4.20 रुपए प्रति यूनिट
201-400 यूनिट: 5.60 रुपए प्रति यूनिट
401-600 यूनिट: 6.60 रुपए प्रति यूनिट
601 से अधिक: 8.30 रुपए प्रति यूनिट
इन दरों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी (Electricity Tariff Hike) के बाद 400 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ सकता है।
जनसुनवाई और विरोध के सुर
नियामक आयोग द्वारा आयोजित जनसुनवाई में यह बात सामने आई कि जनता बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली और घाटे के दावों से संतुष्ट नहीं है। उपभोक्ता संगठनों का तर्क है कि बिजली चोरी रोकने और लाइनलॉस कम करने के बजाय सीधा बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर डालना उचित नहीं है। फिर भी, नियामक आयोग को राजस्व और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए टैरिफ में संशोधन (Electricity Tariff Hike) को अनिवार्य कदम के रूप में देखना पड़ रहा है अगले सप्ताह घोषित होने वाली नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जा सकती हैं। ऐसे में प्रदेश के 60 लाख उपभोक्ताओं को अब अपने बिजली खर्च में कटौती करने या बढ़े हुए बिल के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
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