Chhattisgarh Naxal News : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों को माओवाद (Naxal Surrender Bastar) के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार माओवादियों के ठिकानों से पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में नकदी, सोना और हथियार बरामद किए गए हैं। साथ ही 108 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इस पूरी कार्रवाई को माओवादी कार्रवाई के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार माओवादियों के डंप से 3 करोड़ 61 लाख रुपये नकद, लगभग एक किलो सोना और 101 अत्याधुनिक हथियार बरामद किए गए हैं। बरामद हथियारों में एके-47, इंसास राइफल, बीजीएल लॉन्चर जैसे घातक हथियार शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस कार्रवाई से माओवादी संगठन को भारी नुकसान पहुंचा है और माओवादी गतिविधियों (Naxal Surrender Bastar) की कमर टूटने जैसी स्थिति बन रही है।
108 नक्सली दंडकारण्य क्षेत्र में थे सक्रिय
जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले सभी 108 नक्सली दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय थे और लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए थे। इन पर कुल मिलाकर लगभग 3 करोड़ 95 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सभी नक्सलियों ने जगदलपुर में चल रही ‘पूना मारगेम’ पहल के तहत हथियार डाल दिए। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान नक्सलियों को हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है और माओवादी समर्पण अभियान (Naxal Surrender Bastar) में यह एक बड़ी सफलता है।
कई बड़े रैंक के नक्सली शामिल (Naxal Surrender Bastar)
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े रैंक के नक्सली शामिल हैं। इनमें बीजापुर जिले से 37, दंतेवाड़ा से 30, सुकमा से 18, बस्तर से 16, नारायणपुर से 4 और कांकेर जिले से 3 माओवादी शामिल हैं। इनमें कई महिला माओवादी भी हैं। खास बात यह है कि आत्मसमर्पण करने वालों में 6 मंडल कमांडर भी शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर नक्सली आत्मसमर्पण (Naxal Surrender Bastar) का मामला पहले बहुत कम देखने को मिला है।
पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 6 डिवीजन कमेटी सदस्य, 3 कंपनी पार्टी कमेटी सदस्य, 18 पीपीसीएम रैंक और 23 एरिया कमेटी रैंक के माओवादी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार यह अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण है, जिसने नक्सल संगठन की रणनीतिक क्षमता को कमजोर कर दिया है।
नक्सलवाद का दायरा तेजी से सिमट रहा
इस बीच राज्य सरकार का दावा है कि लगातार हो रही कार्रवाई से नक्सलवाद का दायरा तेजी से सिमट रहा है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि पिछले कुछ समय में राज्य में 532 नक्सली मारे गए, 2,004 गिरफ्तार किए गए और 2,700 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। सरकार का कहना है कि लगातार हो रही कार्रवाई से माओवादी नेटवर्क (Naxal Surrender Bastar) को बड़ा झटका लगा है।
सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए अभियानों में माओवादी संगठन के कई बड़े नेता भी मारे गए हैं। इनमें पोलित ब्यूरो और केंद्रीय कमेटी के छह सदस्य तथा स्पेशल जोनल कमेटी के 17 सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा माओवादी महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू, कई हमलों के मास्टरमाइंड माडवी हिडमा, ओडिशा प्रमुख गणेश उइके और मोडेम बालकृष्ण जैसे बड़े नाम भी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में ढेर किए जा चुके हैं।
31 मार्च 2026 तक की समयसीमा तय
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 तक की समयसीमा तय की गई है। ऐसे में बस्तर में 108 नक्सलियों का आत्मसमर्पण और करोड़ों रुपये की बरामदगी को इस दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह माओवादी समर्पण और कार्रवाई (Naxal Surrender Bastar) जारी रही तो आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र पूरी तरह नक्सल प्रभाव से मुक्त हो सकता है।

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