T20 World Cup 2026 : “अभिषेक की फॉर्म को लेकर (Ind Vs SA) जो लोग चिंता कर रहे हैं, उनके लिए मैं चिंता करता हूं कि अभिषेक की फॉर्म को लेकर इतने चिंतित क्यों हैं। मतलब आप बोल रहे, अभिषेक की जगह उसको (संजू सैमसन) खिलाऊं। तो मतलब तिलक की जगह खिलाऊं। अच्छा ही चल रहा है। पावरप्ले में 40-50 रन बना ही रहे हैं। वो तो नॉर्मल क्रिकेट है। अब हमने बायलेट्रल में इतना अच्छा खेल लिया है तो उम्मीदें बढ़ जाती हैं, खुद से भी अच्छा करने की उम्मीद होती है। हमें उम्मीद रहती है कि 240-250 बना दें। विकेट यहां थोड़े से अलग हैं, जो चार मैच खेले उसमें परिस्थितियां मुश्किल रहीं। ऑफ स्पिनर पहले नहीं डाल रहे थे, अब डाल रहे हैं। ऐसे में हमें उसकी तैयारी करनी होगी।”
उपरोक्त बयान भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने साउथ अफ्रीका (Ind Vs SA) के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप मुकाबले से पहले दिया था। उस वक्त टीम इंडिया का आत्मविश्वास चरम पर दिखाई दे रहा था और कप्तान ने साफ संकेत दिया था कि टीम बड़े स्कोर की मानसिकता के साथ मैदान में उतर रही है। उन्होंने पावरप्ले में लगातार रन बनने और अभिषेक शर्मा व तिलक वर्मा की फॉर्म को लेकर उठ रहे सवालों को गैरजरूरी बताया था। साथ ही विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को प्लेइंग-11 में शामिल करने की जरूरत से भी उन्होंने इनकार किया था। लेकिन मैच का परिणाम सामने आने के बाद यही आत्मविश्वास अब (Over Confidence) के रूप में चर्चा का विषय बन गया है।
ग्रुप स्टेज में लगातार चार जीत ने भारतीय टीम को अजेय होने का अहसास जरूर कराया, लेकिन असली परीक्षा सुपर-8 चरण में साउथ अफ्रीका (Ind Vs SA) के खिलाफ हुई। काली मिट्टी की धीमी पिच पर गेंद रुककर आ रही थी और बल्लेबाजी आसान नहीं थी, इसके बावजूद भारतीय बल्लेबाज उसी आक्रामक टेम्पलेट पर टिके रहे।
परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति बदलने की बजाय आक्रामक अंदाज जारी रखा गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि 188 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पूरी टीम मात्र 111 रनों पर सिमट गई। यह हार टीम की रणनीतिक (Over Confidence) का परिणाम मानी जा रही है।
Ind Vs SA अभिषेक-तिलक को लेकर बड़ा कॉल लेना होगा
सूर्यकुमार यादव ने मैच से पहले स्वीकार किया था कि परिस्थितियां अलग हैं और ऑफ स्पिन का इस्तेमाल बढ़ा है, जिसके लिए विशेष तैयारी की जरूरत होगी। हालांकि मैदान पर तैयारी कम और आत्मविश्वास ज्यादा नजर आया। ईशान किशन पहले ही ओवर में पार्टटाइम ऑफ स्पिनर एडेन मार्करम का शिकार बन गए।
खराब फॉर्म से गुजर रहे तिलक वर्मा ने गैर जिम्मेदाराना शॉट खेलकर विकेट गंवाया और टीम का एक महत्वपूर्ण रिव्यू (Ind Vs SA) भी खत्म कर दिया। अभिषेक शर्मा डक पर आउट तो नहीं हुए, लेकिन 15 रन की पारी के दौरान पूरी तरह संघर्ष करते दिखे और लय से बाहर नजर आए। यह स्थिति भी टीम के (Over Confidence) की ओर इशारा करती रही।
शुरुआती विकेट गिरने के बावजूद किसी बल्लेबाज (Ind Vs SA) ने पारी को संभालने या मैच की गति बदलने की कोशिश नहीं की। ‘हर हाल में अटैक’ की रणनीति पर अड़े रहने की जिद टीम पर भारी पड़ गई। विडंबना यह रही कि गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह ने शानदार मेहनत कर विपक्ष को नियंत्रित रखा था, लेकिन बल्लेबाजी इकाई उस मेहनत का फायदा नहीं उठा सकी। 188 रन का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन असंभव नहीं था। इसके बावजूद टॉप ऑर्डर जल्दी आउट हुआ, कप्तान खुद 18 रन बनाकर लौट गए और मिडिल ऑर्डर दबाव में पूरी तरह टूट गया। यह हार सामूहिक (Over Confidence) का उदाहरण बन गई।
अक्षर को बाहर रखना कहां तक उचित था
टीम चयन में भी आत्मविश्वास की झलक स्पष्ट दिखाई दी। परिस्थितियों को देखते हुए संतुलित संयोजन की जरूरत थी, लेकिन आक्रामक सोच को प्राथमिकता दी गई। वॉशिंगटन सुंदर को उप-कप्तान अक्षर पटेल पर तरजीह देना कई क्रिकेट विशेषज्ञों को समझ से परे लगा। इतना ही नहीं, बल्लेबाजी क्रम में सुंदर को इन-फॉर्म शिवम दुबे से ऊपर भेजना भी रणनीतिक गलती माना गया। विपक्षी गेंदबाजों ने गति और लेंथ में बदलाव किया, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों के पास कोई वैकल्पिक योजना नजर नहीं आई।
यह हार केवल एक मुकाबले (Ind Vs SA) की हार नहीं मानी जा रही, बल्कि सोच और रणनीति की हार के रूप में देखी जा रही है। बायलेट्रल सीरीज में लगातार सफलता ने टीम इंडिया को यह भरोसा दिलाया कि वही फार्मूला बड़े टूर्नामेंट में भी काम करेगा, लेकिन टी20 वर्ल्ड कप (Ind Vs SA) जैसे मंच पर हर पिच और हर मैच नई चुनौती लेकर आता है। अब स्थिति यह बन गई है कि आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सेमीफाइनल की राह टीम इंडिया के लिए आसान नहीं रह गई है।
आने वाले मुकाबले (Ind Vs SA) अब ‘करो या मरो’ की स्थिति जैसे हो गए हैं। कप्तान का आत्मविश्वास टीम की ताकत जरूर होता है, लेकिन जब वही आत्मविश्वास परिस्थितियों की समझ पर हावी हो जाए तो नुकसान तय हो जाता है। सवाल सूर्यकुमार यादव की क्षमता पर नहीं, बल्कि इस बात पर है कि क्या वह आत्मविश्वास और संतुलन के बीच सही रेखा खींच पाएंगे। बड़े टूर्नामेंट में केवल बड़े बयान नहीं, बल्कि हालात के अनुसार लिए गए फैसले ही जीत की असली कुंजी साबित होते हैं, और यही सीख इस (Over Confidence) से मिली हार ने टीम इंडिया को दी है।

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