डोंगरीपाली थाने के प्रशिक्षु सब इंस्पेक्टर को कानून का ज्ञान नहीं या नेताओं-मंत्रियों का डर?

रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों में चल रहे अवैध परिवहन के नंगे नाच में अब एक ऐसा सनसनीखेज और शर्मनाक सच सामने आया है, जो छत्तीसगढ़ की पुलिस व्यवस्था और प्रशासनिक ईमानदारी के मुंह पर एक करारा तमाचा है। जब बरमकेला इलाके में एक नेता व मंत्री के करीबी के बांटते ओवरलोड ट्रकों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, तो डोंगरीपाली के प्रभारी थाना प्रभारी और प्रशिक्षु सब-इंस्पेक्टर (PSI) गजेंद्र चंद्राकर की तरफ से जो सफाई सामने आयी है, वह किसी हास्यस्पद ड्रामे से कम नहीं है। इनका जवाब सुनकर सारंगढ़-बिलाईगढ़ के पुलिस अधीक्षक (SP) का भी सर शर्मसार हो जाए। 

 

वाह रे खाकी! और कोई बहाना नहीं मिला

क्या एक थानेदार की नाकामी, उसकी मिलीभगत को छुपाने के लिए “सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं है” जैसा बचकाना और घिसा-पिटा बहाना काफी है? जरा सोचिए, जब आम आदमी मामूली ट्रैफिक नियम तोड़ दे या बिना हेलमेट के बाइक चला ले, तो यही डोंगरीपाली पुलिस तुरंत लाठी लेकर दौड़ पड़ती है, मौके पर ही चालान काटती है या गाड़ी जब्त कर लेती है। तब इनका साफ्टवेयर कहां सो रहा होता है? क्या आम जनता के लिए सॉफ्टवेयर चालू रहता है और जैसे ही बात भाजपा के किसी बड़े नेता, मंत्री के करीबी के 26 मौत के ट्रकों की आती है, तो थाना प्रभारी का पूरा सिस्टम ‘ड्रम’ और ‘अंडे’ की तरह बैठ जाता है? 

मंत्री और नेताओं के तलवे चाटती खाकी!

गजेंद्र चंद्राकर जी, आप एक प्रशिक्षु सब-इंस्पेक्टर (PSI) हैं। वर्दी पहनने से पहले आपको देश के कानून, संविधान और जनता की सुरक्षा की कसम दिलाई गई होगी, न कि किसी नेता के इशारों पर अपनी आंखें मूंद लेने की! क्या आपकी कुर्सी और आपकी ट्रेनिंग सिर्फ इसलिए है कि आप रसूखदारों के आगे घुटने टेक दें? एक तरफ सड़कों पर कोयले के ओवरलोड ट्रक, बिना तिरपाल के मौत बनकर दौड़ रहे हैं, मासूम राहगीरों के फेफड़ों में जहर घुल रहा है और खून के छींटे उड़ रहे हैं और दूसरी तरफ आप थाने में बैठकर “सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं है” का रोना रो रहे हैं? 

अगर आपके थाने का सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं है, तो क्या आपकी नैतिकता और आपकी अंतरात्मा भी हमेशा के लिए करप्ट हो चुकी है?  यदि आपमें और आपके अमले में जरा भी प्रशासनिक हिम्मत बची होती, तो सड़क पर दौड़ते उन ट्रकों को सीज करने के लिए सॉफ्टवेयर की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती। लेकिन जब जेबें गर्म हो रही हों और ऊपर से लेकर नीचे तक मलाई कट रही हो, तो ऐसे घटिया बहाने ही मुंह से निकलते हैं। 

साफ्टवेयर का रोना बंद करो PSI साहब! 

बरमकेला-सोहेला ओडिशा मार्ग पर दौड़ रहे बिना तिरपाल ढंके कोयला लोड वाहनों की चालानी कार्रवाई को लेकर हमारे संवाददाता ने चर्चा की तो डोंगरीपाली थाना प्रभारी और प्रशिक्षु एसआई (PSI) गजेंद्र चंद्राकर ने कहा कि “e-Challan का साफ्टवेयर अपडेट नहीं है, कार्रवाई सारंगढ़ से होती है”। अरे साहब, कानून की एबीसीडी भूल गए क्या? अगर साफ्टवेयर अपडेट नहीं है, तो क्या मोटर व्हीकल एक्ट बंद हो गया? आनलाइन के साथ-साथ आफलाइन (मैनुअल) चालान काटने और गाड़ियां सीज करने का अधिकार भी कानून ने आपको दे रखा है! यह बचकाना बहाना किसी भोले-भाले ग्रामीण को देना, आपकी अयोग्यता और पुलिसिंग के जीरो ज्ञान की पोल खोलता है। सच तो यह है कि मंत्री के करीबी के मौत बांटते ओवरलोड ट्रकों को बचाने के लिए यह सिर्फ एक ढाल है। बहानेबाजी छोड़िए, जमीर जगाइए और मैदान में उतरकर कार्रवाई कीजिए। 

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