राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। कोरिया (200 Bed District Hospital Building) जिले के बैकुंठपुर में वर्षों से अधूरा पड़ा 200 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय भवन ब शीघ्र ही अपने अंतिम स्वरूप में नजर आएगा। राज्य शासन ने मुख्य बजट वर्ष 2025-26 में शामिल करते हुए अस्पताल भवन के शेष निर्माण कार्य के लिए 22 करोड़ 59 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान कर दी है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के विशेष प्रयासों से यह बहुप्रतीक्षित निर्णय संभव हो सका है। लंबे समय से अधूरे पड़े इस 200 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय भवन (200 Bed District Hospital Building) को लेकर क्षेत्रवासियों में लगातार असंतोष था, क्योंकि अधोसंरचना के अभाव में गंभीर मरीजों को अन्य जिलों या बड़े शहरों की ओर रेफर करना पड़ता था।
गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से इस परियोजना के लिए 35 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। इसके अंतर्गत छह किस्तों में केवल 13 करोड़ रुपए ही निर्माण एजेंसी को जारी हो सके। इसी दौरान कोरिया जिले के विभाजन और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर नए जिले के गठन के कारण डीएमएफ मद से आगे राशि आवंटन बाधित हो गया, जिससे 200 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय भवन (200 Bed District Hospital Building) का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने शासन स्तर पर लगातार समीक्षा की। उनके निर्देश पर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) द्वारा संशोधित प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को भेजा गया। प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए इसे मुख्य बजट 2025-26 में शामिल किया गया, जिसके बाद शेष राशि की स्वीकृति संभव हो सकी।
200 Bed District Hospital Building 22 करोड़ 59 लाख रुपए की स्वीकृति
अब 22 करोड़ 59 लाख रुपए की स्वीकृति मिलने के साथ ही 200 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय भवन (200 Bed District Hospital Building) का निर्माण कार्य पुनः प्रारंभ किया जाएगा। इसके पूर्ण होने से कोरिया जिले के साथ-साथ आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों के हजारों नागरिकों को उन्नत और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, बेहतर जांच सुविधाएं और आधुनिक उपचार से क्षेत्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में यह निर्णय राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और इसे ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।











