Surajpur Bhoomipujan Controversy : जब भूमिपूजन कार्यक्रम का मंच बना अखाड़ा, मंत्री के सामने भाजपा नेताओं में बवाल, VIDEO वायरल

Chhattisgarh Political News : सूरजपुर जिले के ग्राम धोंधा में 14.91 करोड़ की लागत से बनने वाले कृषि महाविद्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मंच पर ही भाजपा नेताओं के बीच तीखा विवाद हो गया। मंत्री रामविचार नेताम और विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते की मौजूदगी में हुई इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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Surajpur Bhoomipujan Controversy
Highlights
  • कृषि महाविद्यालय के भूमिपूजन में मंच पर भाजपा नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक
  • मंत्री रामविचार नेताम और विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते की मौजूदगी में बढ़ा विवाद
  • घटना का वीडियो वायरल, क्षेत्र में भाजपा अंतर्कलह की चर्चा तेज

Chhattisgarh Political News : सूरजपुर जिले के ग्राम धोंधा में आयोजित कृषि महाविद्यालय के (Surajpur Bhoomipujan Controversy) भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान उस समय अप्रिय स्थिति बन गई जब मंच पर ही भाजपा नेताओं के बीच तीखा विवाद शुरू हो गया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम और प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते मौजूद थे। उनकी उपस्थिति में हुई इस घटना ने स्थानीय राजनीति में भाजपा अंतर्कलह को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।

शासन द्वारा ग्राम धोंधा में 14.91 करोड़ रुपये की लागत से कृषि महाविद्यालय के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह परियोजना क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बीते सोमवार को इसी के भूमिपूजन के लिए मंत्री रामविचार नेताम, विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते, जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणि पैकरा, जिला पंचायत सदस्य लवकेश पैकरा सहित अन्य पदाधिकारी पहुंचे थे। भूमिपूजन की औपचारिकता पूरी होने के बाद मंच पर भाषण का क्रम चल रहा था, तभी विवाद की स्थिति बन गई।

जानकारी के अनुसार मंच पर लगी कुर्सियों में बैठने को लेकर भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनूप गुप्ता और प्रतापपुर भाजपा मंडल अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल के बीच कहासुनी शुरू हो गई। मुकेश अग्रवाल ने अनूप गुप्ता से कुर्सी खाली करने को कहा, जिस पर अनूप गुप्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि वे जहां बैठे हैं वहीं बैठेंगे। इसी बात पर दोनों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विवाद इतना बढ़ गया कि माहौल तनावपूर्ण हो गया और कुछ देर के लिए कार्यक्रम की गरिमा प्रभावित हुई। इस घटना को स्थानीय स्तर पर भाजपा अंतर्कलह (Surajpur Bhoomipujan Controversy) से जोड़कर देखा जा रहा है।

बताया जाता है कि बहस के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर राजनीतिक आरोप भी लगाए। मुकेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि अनूप गुप्ता विधायक के संबंध में नकारात्मक बातें फैलाते हैं, जिस पर अनूप गुप्ता ने विरोध जताया। मंच पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप कर दोनों को शांत कराया, जिससे स्थिति नियंत्रण में आ सकी। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने कार्यक्रम की सकारात्मकता को प्रभावित किया और भाजपा अंतर्कलह (BJP Infighting) को लेकर चर्चाओं को और हवा मिल गई।

घटना (Surajpur Bhoomipujan Controversy) से जुड़ा एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। वीडियो में मंच पर मौजूद नेताओं के सामने हो रही नोकझोंक साफ दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे अनुशासनहीनता बताया, तो कुछ ने इसे स्थानीय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का परिणाम माना। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की घटनाएं पार्टी की छवि पर असर डालती हैं और भाजपा अंतर्कलह (BJP Infighting) की धारणा को मजबूत करती हैं।

विधायक के आने से पहले शुरू हुआ कार्यक्रम Surajpur Bhoomipujan Controversy

सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत को लेकर भी असहमति सामने आई। बताया जा रहा है कि मंत्री रामविचार नेताम कार्यक्रम स्थल पर पहले पहुंच गए थे। उनके समर्थकों ने मंत्री की व्यस्तता का हवाला देते हुए भूमिपूजन (Surajpur Bhoomipujan Controversy) शीघ्र प्रारंभ कराने का आग्रह किया। वहीं विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के समर्थकों का कहना था कि उनके पहुंचने के बाद ही कार्यक्रम शुरू होना चाहिए। इसके बावजूद भूमिपूजन विधायक के पहुंचने से पहले ही प्रारंभ कर दिया गया। कुछ ही देर बाद विधायक भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं और औपचारिक रूप से शामिल हुईं।

इस घटनाक्रम (Surajpur Bhoomipujan Controversy) ने दोनों जनप्रतिनिधियों के समर्थकों के बीच तालमेल की कमी को उजागर किया। स्थानीय स्तर पर इसे भाजपा अंतर्कलह (BJP Infighting) का संकेत माना जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन क्षेत्र में इस विषय को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

कृषि महाविद्यालय सूरजपुर की स्थापना क्षेत्र के शैक्षणिक और कृषि विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है। 14.91 करोड़ की लागत से बनने वाला यह महाविद्यालय स्थानीय युवाओं को कृषि शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। बावजूद इसके, भूमिपूजन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान हुआ विवाद चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि संगठन स्तर पर इस मामले को किस तरह संभाला जाता है और भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाती है।

 


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