Nipah Virus Outbreak : कोरोना के बाद भारत में तेजी से फैल रहा ये वायरस, यहां पहली मौत

कोरोना महामारी के बाद एक और घातक संक्रमण ने स्वास्थ्य तंत्र की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से पहली मौत के बाद सतर्कता बढ़ा दी गई है। यह संक्रमण जानवरों से इंसानों और इंसानों से इंसानों में फैल सकता है, जिसकी मृत्यु दर बेहद चिंताजनक मानी जाती है।

By admin
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Nipah Virus Outbreak
Highlights
  • पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से संक्रमित 25 वर्षीय नर्स की मौत
  • यह संक्रमण चमगादड़ों, दूषित भोजन और इंसान से इंसान में फैल सकता है
  • अभी तक कोई प्रमाणित वैक्सीन उपलब्ध नहीं, बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

Nipah Virus Alert : कोरोना महामारी के बाद देश एक बार फिर खतरनाक संक्रामक बीमारी (Nipah Virus Outbreak) की आशंका से जूझता नजर आ रहा है। पश्चिम बंगाल से सामने आई दुखद घटना ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड में ला दिया है। बारासात के नारायण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में निपाह वायरस से संक्रमित 25 वर्षीय नर्स की मौत हो गई। इस घटना को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी जारी की है और इसे देश में उभरते खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह नर्स लंबे समय तक कोमा में रही। संक्रमण ने उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बुरी तरह कमजोर कर दिया था। डॉक्टरों की लगातार कोशिशों के बावजूद गुरुवार शाम 4:20 बजे उसकी मृत्यु हो गई। इस मामले ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को सतर्क कर दिया है और इसे संभावित प्रकोप की शुरुआती चेतावनी माना जा रहा है (Nipah Virus Alert)।

क्या है निपाह वायरस Nipah Virus Outbreak

निपाह वायरस (Nipah Virus Outbreak) हेनिपावायरस परिवार का एक प्राणीजन्य वायरस है, जो मुख्य रूप से जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसकी पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया में हुई थी। इसकी मृत्यु दर 40% से 75% तक हो सकती है, जो इसे अत्यंत घातक संक्रमण बनाती है।

बीमारी (Nipah Virus Alert) की शुरुआत 31 दिसंबर 2025 को हुई जब नर्स नए साल की छुट्टियां मनाने पूर्वी बर्धमान गई थी। जनवरी की शुरुआत में उसे तेज बुखार और संक्रमण के लक्षण महसूस हुए। पहले उसे बर्धमान मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, फिर हालत बिगड़ने पर बारासात के निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया। इस पूरी घटना ने स्वास्थ्य विभाग को संभावित संक्रमण श्रृंखला की जांच शुरू करने पर मजबूर कर दिया है।

Nipah Virus Alert संक्रमण के प्रमुख स्रोत

संक्रमित फ्रूट बैट्स (चमगादड़)

दूषित फल या खजूर का कच्चा रस

संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ

जनवरी के अंत में नर्स को लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाया गया था और वह होश में आने की कोशिश कर रही थी। लेकिन अचानक फेफड़ों में संक्रमण और कार्डियक अरेस्ट के कारण उसकी हालत बिगड़ गई। यह घटना इस वायरस की गंभीरता को दर्शाती है और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे उच्च जोखिम वाली स्थिति बताया है ।

Nipah Virus Outbreak निपाह के शुरुआती लक्षण

तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, गले में खराश और कमजोरी इसके शुरुआती लक्षण हैं। 4 से 21 दिनों के भीतर लक्षण सामने आ सकते हैं। निपाह वायरस सीधे दिमाग पर हमला करता है और इंसेफेलाइटिस यानी दिमाग में सूजन पैदा करता है। मरीज को चक्कर आने लगते हैं, वह भ्रमित हो जाता है और कई बार कोमा में चला जाता है। यह फेफड़ों को भी संक्रमित कर सकता है, जिससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण कोविड-19 से भी अधिक घातक हो सकता है।

Nipah Virus Outbreak दिमाग पर असर

निपाह संक्रमण (Nipah Virus Outbreak) से दिमाग में सूजन (इंसेफेलाइटिस) हो सकती है, जिससे मरीज को दौरे पड़ सकते हैं और वह कोमा में जा सकता है। पश्चिम बंगाल में दिसंबर 2025 से अब तक दो पुष्ट मामले सामने आए हैं। एक पुरुष नर्स ठीक हो चुका है, लेकिन महिला नर्स की मौत ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने संपर्क में आए लोगों की पहचान कर निगरानी शुरू कर दी है।

क्या इंसान से इंसान में फैलता है

हाँ, अस्पताल या घर में देखभाल के दौरान संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस मुख्य रूप से फ्रूट बैट्स के जरिए फैलता है। उनकी लार, पेशाब या मल में वायरस मौजूद हो सकता है। दूषित फल खाने या खजूर का कच्चा रस पीने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

क्या है रिलेप्सड इंसेफेलाइटिस

कुछ मरीज ठीक होने के बाद भी वर्षों बाद दोबारा दिमागी सूजन से पीड़ित हो सकते हैं। इसे रिलेप्सड इंसेफेलाइटिस कहा जाता है। अभी तक निपाह वायरस के लिए कोई प्रमाणित वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में m102.4 नामक दवा पर शोध चल रहा है, लेकिन यह आम उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर केवल लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं, जिससे बचाव की अहमियत और बढ़ जाती है।

(Nipah Virus Outbreak) क्या है इलाज

कोई प्रमाणित वैक्सीन नहीं। केवल सहायक उपचार (सपोर्टिव केयर) ही विकल्प है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे कुतरे हुए फल न खाएं, पेड़ों से गिरे फल न उठाएं और खजूर का रस उबालकर ही सेवन करें। बीमार व्यक्ति की देखभाल करते समय मास्क और दस्तानों का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।

(Nipah Virus Outbreak) बचाव के उपाय

कुतरे हुए फल न खाएं

खजूर का रस उबालकर पिएं

संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखें

मास्क और दस्ताने का प्रयोग करें

 

केंद्र और राज्य स्वास्थ्य विभाग सतर्क

(Nipah Virus Outbreak) स्थिति को देखते हुए केंद्र और राज्य स्वास्थ्य विभाग सतर्क हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी World Health Organization ने भी पहले निपाह को उच्च जोखिम वाला वायरस बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सतर्कता और निगरानी ही बड़े प्रकोप को रोक सकती है (Nipah Virus Alert)। कोरोना के बाद यह संक्रमण एक नई चुनौती के रूप में उभर रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर पहचान और अलगाव ही इस घातक वायरस की श्रृंखला तोड़ सकता है।

 

 


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