Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ में ईको-टूरिज्म (Moharenga Nature Safari) को नई दिशा देने की कवायद तेज हो गई है। राजधानी रायपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर खरोरा क्षेत्र के ग्राम मोहरेंगा में विकसित ‘नेचर सफारी मोहरेंगा’ अब तेजी से उभरता हुआ पर्यटन केंद्र बनता जा रहा है। यहां शुरू की गई नई सुविधाओं ने इसे प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद पर्यटकों के लिए खास बना दिया है।
प्रकृति के करीब, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना और स्थानीय संस्कृति व वन्यजीवों का सम्मान करते हुए की जाने वाली यात्रा ही ईको-टूरिज्म (Moharenga Nature Safari) की पहचान है। इसी अवधारणा को जमीन पर उतारते हुए मोहरेंगा नेचर सफारी को विकसित किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य वन एवं वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और स्थानीय समुदायों को रोजगार से जोड़ना है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विधायक किरण सिंहदेव, अनुज शर्मा सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसके घने जंगल (Moharenga Nature Safari) और समृद्ध जैव विविधता हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रकृति और इंसान के बीच संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरूक भी बनाती हैं।
500 हेक्टेयर क्षेत्र में यह सफारी Moharenga Nature Safari
करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह सफारी (Moharenga Nature Safari) पर्यटकों को 10 किलोमीटर लंबी जिप्सी सफारी का रोमांचक अनुभव देती है। सफारी के दौरान चीतल, जंगली सूअर, खरगोश, अजगर जैसे वन्यजीवों के साथ नीलकंठ, कोयल और ईगल जैसे पक्षियों को करीब से देखने का अवसर मिलता है। यही अनुभव इसे आसपास के अन्य पर्यटन स्थलों से अलग बनाता है।
पर्यटकों के लिए ये सुविधाएं
पर्यटकों (Moharenga Nature Safari) की सुविधा के लिए यहां वॉच टॉवर, किड्स प्ले एरिया और आकर्षक गार्डन विकसित किए गए हैं। रात्रि विश्राम के लिए चार सुसज्जित कॉटेज तैयार किए गए हैं, जहां पर्यटक जंगल के बीच ठहरने का अनोखा अनुभव ले सकते हैं। विशेष बात यह है कि यहां के रेस्टोरेंट का संचालन ‘जय माँ अंबे महिला स्व-सहायता समूह’ द्वारा किया जा रहा है, जिससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिल रहा है और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है।

16 किलोमीटर लंबी चेनलिंक फेंसिंग
वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सफारी क्षेत्र में 8 तालाब, एनीकट और घास के मैदान विकसित किए गए हैं, जिनमें सौर ऊर्जा आधारित पंपों से पानी की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगभग 16 किलोमीटर लंबी चेनलिंक फेंसिंग भी की गई है।

यह क्षेत्र साजा, खैर, महुआ, अर्जुन जैसे उपयोगी वृक्षों के साथ-साथ सफेद मुसली और सतावर जैसी औषधीय वनस्पतियों से समृद्ध है। साथ ही यहां स्थित ‘दोहरा तिहरा माता’ मंदिर श्रद्धालुओं (Moharenga Nature Safari) के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य के साथ आध्यात्मिक अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं।
स्पष्ट है कि मोहरेंगा नेचर सफारी अब केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार और सतत विकास का मजबूत मॉडल बनकर उभर रहा है। आने वाले समय में यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मोहरेंगा नेचर सफारी में पर्यटकों के लिए 10 किलोमीटर लंबी जिप्सी सफारी, वॉच टॉवर, किड्स प्ले एरिया, आकर्षक गार्डन और रात्रि विश्राम के लिए सुसज्जित कॉटेज जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां वन्यजीवों को करीब से देखने का अवसर मिलता है और स्थानीय महिला समूह द्वारा संचालित रेस्टोरेंट में भोजन की सुविधा भी उपलब्ध है।

मोहरेंगा नेचर सफारी रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर तिल्दा-खरोरा मार्ग पर स्थित है। यहां सड़क मार्ग से निजी वाहन या टैक्सी के माध्यम से आसानी से पहुंचा जा सकता है। नजदीकी रेलवे स्टेशन रायपुर है, जबकि स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से भी सड़क मार्ग द्वारा सीधा संपर्क उपलब्ध है, जिससे यह स्थल वीकेंड पर्यटन के लिए सुविधाजनक बन गया है।



