Baramkela News : जंगल की ताजगी और भीनी महक से भरे महुआ (Mahua) के फूल इन दिनों वन क्षेत्र की ज़मीन को ढंकने लगे हैं। बरमकेला वन परिक्षेत्र के दानव करवट पहाड़ के समीप ग्राम कुधरगढ़ी के पास, महुआ के पेड़ों से फूल झरने लगे हैं और इसी के साथ शुरू हो गया है ग्रामीणों का पारंपरिक संग्रहण कार्य।
हर साल की तरह इस बार भी अलसुबह महिलाएं और पुरुष टोली बनाकर महुआ (Mahua) बीनने जंगलों की ओर निकलने लगे हैं। 56 वर्षीय द्रुपति कोडाकू, अपने दो नाती-पोतों के साथ महुआ बीनने सड़क किनारे पहुंची थीं। वे बताती हैं, “इस बार फूलों की पैदावार थोड़ी कम है, पिछले साल ज्यादा फूल गिरे थे तो आमदनी भी अच्छी हुई थी।”
द्रुपति के नाती मिथलेश कोडाकू चार पेड़ों पर चढ़कर फूलों और कच्चे फलों की स्थिति देख रहा था। हालांकि, पेड़ों पर पत्ते झड़ चुके हैं, लेकिन मौसम की वजह से फल अभी तक पके नहीं हैं। पेड़ों पर हरे-हरे गोल फल लटके हुए हैं, जो अभी पकने की प्रतीक्षा में हैं।
ग्रामीणों के लिए महुआ (Mahua) सिर्फ एक फूल नहीं, बल्कि आय और परंपरा का स्रोत है। यह समय उनके लिए त्योहार जैसा होता है, जब पूरा गांव इस प्राकृतिक उपहार को संजोने में जुट जाता है।

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