Iran-Israel War : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव (Iran-Israel War) ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच भारत सरकार भी सतर्क नजर आ रही है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली, जिसमें वेस्ट एशिया के तेजी से बदलते हालात की विस्तृत समीक्षा की गई।
Iran-Israel War बैठक में क्या हुआ
सूत्रों के अनुसार, बैठक में 28 फरवरी को ईरान में हुए एयर स्ट्राइक और उसके बाद बढ़ी हिंसा (Iran-Israel War) से जुड़े घटनाक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा हालात प्रभावित होने और संभावित क्षेत्रीय अस्थिरता पर भी चर्चा की गई।
बैठक के दौरान इस बात पर विशेष चिंता जताई गई कि वेस्ट एशिया में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक और प्रवासी समुदाय निवास करते हैं। मौजूदा हालात (Iran-Israel War) उनके लिए सुरक्षा और आवाजाही से जुड़ी चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा वहां पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों, परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों और यात्रियों को हो रही परेशानियों का भी आकलन किया गया।
CCS ने क्षेत्र में जारी तनाव का आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी रिव्यू किया। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और वैश्विक बाजारों पर पड़ने वाले असर को लेकर संबंधित मंत्रालयों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर जोर
बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी संबंधित विभाग प्रभावित भारतीयों की सहायता के लिए जरूरी कदम तुरंत उठाएं। सरकार ने दूतावासों और मिशनों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नागरिकों को सहायता उपलब्ध कराई जा सके। CCS ने मौजूदा संघर्ष (Iran-Israel War) को जल्द समाप्त करने और कूटनीतिक संवाद के जरिए समाधान निकालने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बैठक में कौन-कौन रहा शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक (Iran-Israel War) में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा, शक्तिकांत दास, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिसरी शामिल रहे।
बैठक में सुरक्षा एजेंसियों और कूटनीतिक स्तर पर आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई, ताकि क्षेत्र में स्थिति और बिगड़ने की स्थिति में भारत की तैयारी मजबूत बनी रहे। सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।



