Farmer Success Story Chhattisgarh : सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की सरिया तहसील अंतर्गत (Cross Farming Model) बुदबुदा ग्राम पंचायत के नावापारा (छोटे) गांव में खेती का एक नया और प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। यहां रिटायरमेंट के बाद आराम करने के बजाय शिव प्रसाद प्रधान ने आधुनिक कृषि की राह चुनी और क्रॉस फार्मिंग के जरिए खेती को आय का मजबूत साधन बना दिया। उनकी पहल अब आसपास के किसानों और युवाओं के लिए सीखने का केंद्र बनती जा रही है।
दिसंबर 2023 में असिस्टेंट वेटनरी फील्ड ऑफिसर पद से सेवानिवृत्त होने के बाद शिव प्रसाद प्रधान ने खेती में प्रयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने करीब 3 एकड़ जमीन पर नारियल की खेती शुरू की और पारंपरिक खेती से अलग सोच अपनाते हुए बहु-फसली खेती (Cross Farming Model) का मॉडल विकसित किया। इस कार्य में उनके बेटे सानंद प्रधान भी सक्रिय रूप से साथ दे रहे हैं और खेत को आधुनिक फार्म हाउस के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ओडिशा से मिली प्रेरणा, गांव में शुरू हुआ प्रयोग
शिव प्रसाद प्रधान बताते हैं कि ओडिशा यात्रा के दौरान पुरी में नारियल के विशाल खेत देखकर उनके मन में यह विचार आया। वहां किसानों से चर्चा के दौरान उन्हें पता चला कि नारियल दीर्घकालिक और स्थायी आय का मजबूत स्रोत बन सकता है। इसी प्रेरणा से उन्होंने गांव लौटकर नारियल आधारित खेती (Cross Farming Model) शुरू करने का निर्णय लिया।
इसके बाद नारियल विकास बोर्ड कोंडागांव से लगभग 250 पौधे मंगाए गए। नवंबर माह में वैज्ञानिक पद्धति से पौधरोपण किया गया। मिट्टी की गुणवत्ता, जल निकासी और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पौधों की देखभाल की जा रही है ताकि भविष्य में बेहतर उत्पादन मिल सके।
खाली जमीन को बनाया कमाई का साधन
नारियल के पौधे बड़े होने में समय लेते हैं, इसलिए उनके बीच की खाली जमीन को बेकार छोड़ने के बजाय कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में क्रॉस फार्मिंग (Cross Farming Model) की शुरुआत की गई। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संतोषिनी गुप्ता (RHEO) की सलाह पर गेंदा, अरबी, टमाटर और धनिया की खेती साथ में शुरू की गई।
नारियल रोपण के लगभग एक महीने बाद गेंदा और अरबी की फसल लगाई गई। कुछ ही समय में गेंदा फूल की बिक्री से आमदनी शुरू हो गई। इससे यह साबित हुआ कि लंबी अवधि की फसल के साथ अल्पकालिक फसलें जोड़कर किसान नियमित आय सुनिश्चित कर सकते हैं। यह मिश्रित खेती मॉडल (Cross Farming Model) किसानों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन रहा है।
त्वरित और स्थायी आय का संतुलन
विशेषज्ञों के अनुसार नारियल की फसल से स्थायी आय आने में समय लगता है, लेकिन बीच की फसलों से तत्काल आर्थिक लाभ मिल जाता है। शिव प्रसाद प्रधान का कहना है कि सही योजना और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर खेती को जोखिम से मुक्त बनाया जा सकता है। उनके खेत में अपनाया गया आधुनिक कृषि प्रयोग (Cross Farming Model) इसी सोच का उदाहरण है।
आज गेंदा फूल की बिक्री से नियमित आय शुरू हो चुकी है, जबकि अरबी, टमाटर और धनिया की फसल भी तैयार हो रही है। इससे खेती का खर्च निकलने के साथ अतिरिक्त लाभ भी मिल रहा है।
युवाओं के लिए बन रहा सीखने का केंद्र
नावापारा (छोटे) गांव का यह खेत अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि नवाचार का केंद्र बन चुका है। आसपास के गांवों के युवा और किसान यहां आकर खेती की तकनीक समझ रहे हैं। शिव प्रसाद प्रधान का मानना है कि खेती में नई सोच और तकनीक अपनाने से ग्रामीण युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
वे कहते हैं कि अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ आय बढ़ाने वाली खेती प्रणाली (Cross Farming Model) अपनाएं तो गांवों से पलायन भी कम हो सकता है और कृषि लाभकारी व्यवसाय बन सकती है।
Cross Farming Model कृषि विभाग ने सराहा प्रयास
बीते शुक्रवार को कृषि विभाग के उप संचालक आशुतोष श्रीवास्तव अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम के साथ खेत पहुंचे और पूरे मॉडल का निरीक्षण किया। विभागीय अधिकारियों ने इस प्रयोग को क्षेत्र के लिए सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल बताया। अधिकारियों का कहना है कि यह सतत कृषि मॉडल (Cross Farming Model) भविष्य में अन्य किसानों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है।
नई सोच से बदलती खेती की तस्वीर
रिटायरमेंट के बाद जहां अधिकांश लोग विश्राम को प्राथमिकता देते हैं, वहीं शिव प्रसाद प्रधान ने खेती को नवाचार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बना दिया। नारियल के साथ गेंदा, अरबी, टमाटर और धनिया की क्रॉस फार्मिंग ने यह साबित कर दिया है कि बदलती सोच और वैज्ञानिक पद्धति से खेती भी स्थायी आय का मजबूत स्रोत बन सकती है। नावापारा (छोटे) का यह खेत अब एक सफल उदाहरण बन चुका है, जो दिखाता है कि आधुनिक कृषि अपनाकर गांवों में भी आर्थिक समृद्धि की नई कहानी लिखी जा सकती है।

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