छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में कृषि क्षेत्र (Crop Diversification) में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध यह जिला अब वैकल्पिक खेती मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां किसान पारंपरिक फसल पर निर्भर रहने के बजाय नई कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं। बदलते कृषि परिदृश्य में फसलचक्र परिवर्तन किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है।
धान से आगे बढ़ती खेती की नई दिशा
लंबे समय तक धान-प्रधान खेती पर आधारित रहे धमतरी में अब दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की खेती तेजी से बढ़ रही है। सरसों, चना, मक्का और विशेष रूप से रागी (मंडुआ) की खेती में किसानों की भागीदारी बढ़ना जिले में कृषि बदलाव का स्पष्ट संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार कृषि विविधीकरण मॉडल (Crop Diversification) न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है बल्कि भूमि की उर्वरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बदलाव जल संरक्षण और लागत नियंत्रण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कम पानी और कम लागत वाली फसलें किसानों को जोखिम से बचाती हैं।
Crop Diversification दलहन खेती का बढ़ता रकबा
वर्तमान रबी सीजन में धमतरी जिले में दलहन फसलों का रकबा लगभग 18,450 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। इसमें चना की खेती लगभग 14,200 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है, जबकि अरहर 2,150 हेक्टेयर और मसूर लगभग 2,100 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई है। दलहन फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर भूमि की गुणवत्ता सुधारती हैं, जिससे आगामी फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। यही कारण है कि किसान अब संतुलित खेती प्रणाली (Crop Diversification) को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
तिलहन फसलों में सरसों पहली पसंद
तिलहन फसलों के क्षेत्र में भी धमतरी जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। जिले में लगभग 9,600 हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन की खेती की जा रही है, जिसमें 8,300 हेक्टेयर में सरसों और करीब 1,300 हेक्टेयर में अन्य तिलहन फसलें शामिल हैं। सरसों की खेती किसानों को अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत दे रही है, क्योंकि बाजार में इसकी मांग स्थिर बनी रहती है। कृषि विभाग के अनुसार आय आधारित खेती प्रणाली (Crop Diversification) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान कर रही है।
रागी बना पोषण और आय का नया आधार
मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की दिशा में रागी की खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। कम पानी में तैयार होने वाली और पोषण से भरपूर यह फसल छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। वर्तमान में जिले में लगभग 1,250 हेक्टेयर क्षेत्र में रागी की खेती हो रही है, जिसमें करीब 1,180 किसान सक्रिय रूप से जुड़े हैं।
मगरलोड विकासखंड के पंडरीपानी (म), भटगांव और सिरकट्टा सहित कई गांवों में रागी रोपाई का कार्य जारी है। यहां महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय है, जो महिला कृषि सशक्तिकरण (Crop Diversification) की मजबूत मिसाल बन रही है।
महिलाओं की भागीदारी से बढ़ी आत्मनिर्भरता
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खेतों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। रागी उत्पादन से उन्हें रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और परिवार की आय में सीधा योगदान बढ़ा है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ सामाजिक सशक्तिकरण भी मजबूत हुआ है।
प्रशासन और कृषि विभाग की पहल
जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज, प्रशिक्षण और योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है। किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर प्रेरित करने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु अनुकूल कृषि मॉडल (Crop Diversification) भविष्य की खेती का आधार बनेगा, क्योंकि यह जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद करता है।
भविष्य की दिशा
धमतरी जिले को आने वाले वर्षों में दलहन, तिलहन और मोटे अनाज उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास जारी हैं। फसल विविधीकरण के माध्यम से किसान अब जोखिम कम कर स्थायी आय की ओर बढ़ रहे हैं। यह परिवर्तन केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। धमतरी का यह मॉडल प्रदेश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।







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