Raigarh News : छत्तीसगढ़ विधानसभा के षष्ठम विधानसभा के अष्टम सत्र (Assembly Session Leave Ban) के मद्देनज़र जिला प्रशासन ने प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने जिले के समस्त शासकीय विभागों में पदस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विधानसभा सत्र की अवधि के दौरान सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना न तो कोई अधिकारी-कर्मचारी अवकाश पर रहेगा और न ही मुख्यालय छोड़ेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
रायगढ़ कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार छत्तीसगढ़ विधानसभा का अष्टम सत्र सोमवार 23 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर शुक्रवार 20 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस अवधि में विधानसभा से संबंधित कार्यों को समयबद्ध, सटीक और प्रभावी ढंग से संपादित करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। विधानसभा के अष्टम सत्र (Assembly Session Leave Ban) के तहत सभी विभागों को पूर्ण सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
विधानसभा सत्र के दौरान तारांकित एवं अतारांकित प्रश्न, ध्यानाकर्षण सूचनाएं, स्थगन प्रस्ताव, शून्यकाल से जुड़े विषय, आश्वासन, अशासकीय संकल्प, याचिकाएं तथा लोक लेखा समिति से संबंधित पत्राचार बड़ी संख्या में प्राप्त होते हैं। इन सभी विषयों पर निर्धारित समय-सीमा में उत्तर भेजना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। विधानसभा के अष्टम सत्र (Assembly Session Leave Ban) का उद्देश्य यही सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्तर पर जानकारी के संकलन या जवाब प्रेषण में विलंब न हो।
Assembly Session Leave Ban आदेश का पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाई
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी बिना स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित पाया जाता है या बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ता है, तो इसके लिए संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के साथ-साथ उनके कार्यालय प्रमुख भी समान रूप से उत्तरदायी माने जाएंगे। विधानसभा के अष्टम सत्र (Assembly Session Leave Ban) के अंतर्गत अनुशासनहीनता को गंभीरता से लिया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से विधानसभा सत्र के दौरान शासन और विधानसभा के बीच समन्वय मजबूत होगा तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों पर त्वरित और तथ्यात्मक जवाब सुनिश्चित किए जा सकेंगे। (Assembly Session Leave Ban) को प्रशासनिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में एक आवश्यक कदम माना जा रहा है।










