Chhattisgarh Crocodile Conservation : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले का कोटमीसोनार (Kotmi Sonar Crocodile Park)गांव आज मगरमच्छ संरक्षण के कारण नई पहचान बना चुका है। यहां स्थापित मगरमच्छ संरक्षण आरक्षिती केंद्र न केवल वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण बन रहा है, बल्कि ग्रामीण विकास और पर्यटन को भी नई दिशा दे रहा है।
मगरमच्छों के संरक्षण और पुनर्वास की दृष्टि से यह परियोजना (Kotmi Sonar Crocodile Park) बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके माध्यम से न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं।
मगरमच्छ की सभी प्रजातियां लुप्तप्राय नहीं हैं, लेकिन कुछ प्रजातियों की घटती संख्या को देखते हुए उनके संरक्षण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत मगरमच्छ संरक्षण परियोजना शुरू की थी। इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना, कैप्टिव ब्रीडिंग को बढ़ावा देना और नवजात मगरमच्छों के जीवित रहने की दर बढ़ाना है।

250 मगरमच्छ संरक्षित
वन विभाग द्वारा जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोटमीसोनार स्थित मुड़ातालाब को इस परियोजना के लिए चयनित किया गया। विभिन्न जलाशयों से मगरमच्छों को यहां लाकर सुरक्षित वातावरण में छोड़ा गया। वर्तमान में इस केंद्र (Kotmi Sonar Crocodile Park) में लगभग 250 मगरमच्छ संरक्षित हैं, जो इसे प्रदेश का एक महत्वपूर्ण संरक्षण केंद्र बनाता है।
2006 में हुई थी शुरूआत
इस परियोजना की शुरुआत 9 मई 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा शिलान्यास के साथ हुई थी, जबकि 23 अगस्त 2008 को इसका लोकार्पण किया गया। करीब 57.037 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस केंद्र में 34 हेक्टेयर कोर जोन और 23.037 हेक्टेयर बफर जोन निर्धारित किया गया है।
पर्यटन की दृष्टि से भी इस केंद्र (Kotmi Sonar Crocodile Park) को विकसित किया गया है। यहां पर्यटकों के लिए पैगोडा, वॉच टावर, इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफेटेरिया, चिल्ड्रन पार्क, ऊर्जा पार्क और 3-डी मिनी थिएटर जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यहां आने वाले पर्यटकों का अनुभव और भी बेहतर हो रहा है।

2015 से पयर्टन शुल्क लागू
1 नवम्बर 2015 से यहां पर्यटन शुल्क लागू किया गया है, जिसके बाद से पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। बढ़ते पर्यटन के कारण कोटमीसोनार गांव अब एक छोटे बाजार के रूप में विकसित हो रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

आज यह मगरमच्छ संरक्षण केंद्र (Kotmi Sonar Crocodile Park) न केवल वन्यजीवों के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। यह मॉडल इस बात का उदाहरण है कि सही योजना और क्रियान्वयन से पर्यावरण संरक्षण और विकास एक साथ संभव है।
यहां तक पहुंचना बहुत ही आसान
कोटमीसोनार स्थित मुड़ातालाब तक पहुंच भी आसान है। यह जांजगीर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर, जबकि बिलासपुर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नजदीकी रेलवे स्टेशन जांजगीर-नैला, अकलतरा और बिलासपुर हैं, जिससे यहां पहुंचना सुविधाजनक है।

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