Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान (Maoist Surrender Chhattisgarh) को बड़ी सफलता मिली है। बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन के 15 माओवादियों ने सरकार की पुनर्वास नीति पर भरोसा जताते हुए महासमुंद जिले में हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। यह ऐतिहासिक कदम “पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत उठाया गया, जिसे राज्य में शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम को (Naxal Rehabilitation) पहल की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
ओडिशा सीमा से लगे महासमुंद क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आत्मसमर्पण (Maoist Surrender Chhattisgarh) करने वाले युवाओं का स्वागत करते हुए उन्हें नए जीवन की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं बल्कि हिंसा से विकास की ओर लौटने की सकारात्मक पहल है, जो (Naxal Rehabilitation) नीति की सफलता को दर्शाती है।
डिवीजन पूरी तरह समाप्त होने की घोषणा
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस सामूहिक पुनर्वास के साथ ओडिशा राज्य कमेटी का पश्चिमी सब जोन बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन पूरी तरह समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि रायपुर पुलिस रेंज और ओडिशा के संबलपुर रेंज के नक्सल मुक्त (Maoist Surrender Chhattisgarh) होने से अब सीमावर्ती इलाकों में स्थायी शांति स्थापित होगी। प्रशासन का मानना है कि यह (Naxal Rehabilitation) प्रक्रिया क्षेत्र में विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
सरकार की अपील का मिला सकारात्मक परिणाम
जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण (Maoist Surrender Chhattisgarh) से पहले इस डिवीजन के नक्सलियों ने उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा को पत्र लिखकर सरकार की नीतियों पर विश्वास जताया था। इसके बाद उपमुख्यमंत्री ने उनकी सुरक्षा और सम्मान का भरोसा देते हुए आकाशवाणी के माध्यम से ऑडियो संदेश जारी किया और 03 मार्च तक पुनर्वास की अपील की थी। उसी अपील के बाद सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से (Naxal Rehabilitation) के तहत आत्मसमर्पण किया।
मुख्यमंत्री की नीति को बताया निर्णायक
कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में बनाई गई दूरदर्शी पुनर्वास नीति के कारण यह संभव हो सका है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर राज्य से नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। यह सामूहिक आत्मसमर्पण (Naxal Rehabilitation) मॉडल की प्रभावशीलता का उदाहरण है।
शीर्ष इनामी नक्सली भी शामिल
आत्मसमर्पण (Maoist Surrender Chhattisgarh) करने वालों में सबसे प्रमुख नाम वारंगल निवासी विकास उर्फ सुदर्शन उर्फ जंगू उर्फ बाबन्ना उर्फ राजन्ना का है, जो ओडिशा राज्य कमेटी का स्टेट कमेटी मेंबर और बीबीएम डिवीजन प्रभारी था। उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह वर्ष 1985 से संगठन में सक्रिय था। अधिकारियों के अनुसार उसका मुख्यधारा में लौटना (Naxal Rehabilitation) अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
महिलाओं की बड़ी भागीदारी
पुनर्वास करने वाले कुल 15 सदस्यों में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि महिला कैडर का आत्मसमर्पण यह संकेत देता है कि संगठन के भीतर भी बदलाव की इच्छा बढ़ रही है। सभी ने हिंसा छोड़कर सामाजिक जीवन अपनाने का निर्णय लिया, जो (Naxal Rehabilitation) नीति की स्वीकार्यता को दर्शाता है।
Maoist Surrender Chhattisgarh भारी मात्रा में हथियार जमा
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने 14 अत्याधुनिक हथियार भी सुरक्षा बलों को सौंपे, जिनमें 3 एके-47, 2 एसएलआर, 2 इंसास राइफल, 4 .303 राइफल और 3 बारह बोर बंदूक शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे भविष्य में हिंसक घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
क्षेत्र में शांति और विकास की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि डिवीजन के पूर्णतः समाप्त होने से अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को गति मिलेगी। प्रशासन का फोकस अब पुनर्वासित युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्स्थापन से जोड़ने पर रहेगा ताकि (Naxal Rehabilitation) स्थायी रूप से सफल हो सके।

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