Horticulture Farming Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र (Dhaniya Ki Kheti) को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा फसल विविधीकरण को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी पहल के तहत किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राज्य की फसल विविधीकरण योजना अब ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनती दिखाई दे रही है।
राजनांदगांव जिले के ग्राम जंगलेसर के किसान दौलतराम साहू ने इस दिशा में उल्लेखनीय पहल करते हुए 2.5 एकड़ कृषि भूमि में धनिया (Dhaniya Ki Kheti) की खेती शुरू की है। यह प्रयोग न केवल नवाचार का उदाहरण बन रहा है बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा भी बनता जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि परिवर्तन अभियान के तहत ऐसे प्रयास भविष्य की खेती का नया मॉडल तैयार कर सकते हैं।
उद्यानिकी विभाग का मिल रहा तकनीकी सहयोग
किसान दौलतराम साहू ने बताया कि उन्हें उद्यानिकी विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन के साथ 20 किलोग्राम धनिया (Dhaniya Ki Kheti) बीज उपलब्ध कराया गया। विभाग द्वारा समय-समय पर फसल प्रबंधन, सिंचाई और रोग नियंत्रण संबंधी सलाह भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि फसल चक्र परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया, जिससे भूमि की उर्वरक क्षमता में सुधार हो सके। विभाग की यह पहल सरकारी कृषि प्रोत्साहन योजना के तहत किसानों को नई फसलों की ओर आकर्षित कर रही है।

धान के मुकाबले कम लागत और कम पानी (Dhaniya Ki Kheti)
धनिया की खेती को अपनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण कम पानी की आवश्यकता और उत्पादन लागत में कमी है। किसान साहू के अनुसार धान की तुलना में धनिया फसल में सिंचाई कम करनी पड़ती है और रोगों का खतरा भी अपेक्षाकृत कम रहता है।
इससे खेती का जोखिम घटता है और लाभ की संभावना बढ़ती है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल संरक्षण आधारित खेती मॉडल (Dhaniya Ki Kheti) आने वाले समय में किसानों के लिए अधिक टिकाऊ विकल्प साबित होगा।
मार्च-अप्रैल में आय की संभावना
धनिया (Dhaniya Ki Kheti) फसल से मार्च और अप्रैल माह में उत्पादन मिलने की संभावना है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इससे खेती में नकदी प्रवाह बेहतर होता है और किसान एक ही फसल पर निर्भर नहीं रहते। विशेषज्ञों के अनुसार बहु-फसली प्रणाली अपनाने से कृषि आय स्थिर होती है। यही कारण है कि आयवृद्धि आधारित खेती योजना को ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से अपनाया जा रहा है।

फसल विविधीकरण से आर्थिक सशक्तिकरण
दौलतराम साहू का कहना है कि धान की पारंपरिक खेती की तुलना में वैकल्पिक फसलों से बेहतर आय प्राप्त होने की संभावना बढ़ी है। उन्होंने बताया कि खेती में बदलाव से जोखिम कम हुआ है और आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसान आय बढ़ाने की पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
समर्थन मूल्य और सरकारी निर्णय से बढ़ा भरोसा
किसान साहू ने राज्य सरकार द्वारा लिए गए उस निर्णय का भी स्वागत किया, जिसके अनुसार समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अंतर राशि का एकमुश्त भुगतान होली पर्व से पहले किया जाएगा। उन्होंने इसे किसानों के हित में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि इससे किसानों का सरकार पर विश्वास मजबूत हुआ है। यह निर्णय कृषि नीति समर्थन मॉडल को और प्रभावी बनाता है।
स्थायी कृषि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़
राज्य शासन द्वारा जल संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता सुधार और किसानों की आय वृद्धि को ध्यान में रखते हुए उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे कृषि क्षेत्र में संतुलित और स्थायी विकास सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान धान के साथ-साथ वैकल्पिक फसलें अपनाते हैं, तो खेती अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बन सकती है। यही उद्देश्य स्थायी कृषि मिशन (Dhaniya Ki Kheti) के माध्यम से हासिल किया जा रहा है।

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