Bilaspur High Court News : देश के छह उच्च न्यायालयों, जिनमें छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Justice Ravindra Kumar Agrawal) भी शामिल है, को जल्द ही नए न्यायाधीश मिलने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने कई वरिष्ठ वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के नाम उच्च न्यायालयों के लिए सुझाए हैं। सोमवार को प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता में हुई कोलेजियम की बैठक में न्यायिक अधिकारी विमल कुमार यादव को दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश को स्वीकृति दी गई।
सोमवार को हुई कोलेजियम की बैठक में पारित प्रस्तावों को देर रात सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया गया। बैठक में कोलेजियम ने कलकत्ता हाई कोर्ट के दो अतिरिक्त जज जस्टिस पार्थ सारथी सेन और जस्टिस अपूर्वा सिन्हा रे को स्थायी न्यायाधीश बनाए जाने की अनुशंसा को मंजूरी दी। इसके साथ ही अतिरिक्त न्यायाधीशों जस्टिस प्रसेनजीत बिस्वास, जस्टिस उदय कुमार, जस्टिस अजय कुमार गुप्ता, जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य, जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी और जस्टिस मोहम्मद शब्बर रशीदी का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
कोलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल (Justice Ravindra Kumar Agrawal) को स्थायी न्यायाधीश बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। साथ ही, कर्नाटक हाई कोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस गुरुसिद्धैया बसवराज को भी स्थायी न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की गई है। कोलेजियम ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चार अतिरिक्त जजों को स्थायी जज बनाए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा, तीन वकीलों को बॉम्बे हाई कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।
जानिए Justice Ravindra Kumar Agrawal के बारे में
31 जुलाई 1968 को भाटापारा छत्तीसगढ़ में जन्म हुआ । पिता स्वर्गीय डॉ. जी.पी. अग्रवाल (सेवानिवृत्त शल्य विशेषज्ञ) और माता चंद्रमुखी अग्रवाल। प्रारंभिक शिक्षा रायपुर और बिलासपुर में प्राप्त की। विज्ञान स्नातक (B.Sc.) की डिग्री राजनांदगांव स्थित शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय से प्राप्त की, तत्पश्चात वर्ष 1991 में लॉ कॉलेज, राजनांदगांव से विधि स्नातक (LL.B.) की उपाधि प्राप्त की।
विधि क्षेत्र में प्रवेश और प्रारंभिक अभ्यास
14 सितंबर 1992 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए और स्वर्गीय पं. रामाकांत मिश्र के मार्गदर्शन में जिला न्यायालय बिलासपुर एवं अन्य अधीनस्थ न्यायालयों में विधि व्यवसाय प्रारंभ किया। वर्ष 2000 से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में विधिवत अभ्यास आरंभ किया। इस दौरान विशेष रूप से सिविल, क्रिमिनल एवं रिट से जुड़े मामलों में कार्य किया।
सरकारी अधिवक्ता और अन्य दायित्व
उच्च न्यायालय में अभ्यास के दौरान वर्ष 2017 में माननीय न्यायमूर्ति को राज्य सरकार का अधिवक्ता नियुक्त किया गया और दिसंबर 2018 तक इस दायित्व का निर्वहन किया। इसके अतिरिक्त वे भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards), इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ जैसे विभिन्न निजी संस्थानों के अधिवक्ता भी रहे। साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के लिए अधिवक्ताओं के पैनल में भी सम्मिलित रहे। माननीय न्यायमूर्ति को 20 अक्टूबर 2023 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश (Additional Judge) नियुक्त किया गया।