Chhattisgarh Tourism : प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों और घने जंगलों से भरपूर (Foreign Tourists) छत्तीसगढ़ अब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में पर्यटन गतिविधियों में लगातार वृद्धि देखी गई है और खासकर विदेशी पर्यटकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है।
पर्यटन विभाग (Foreign Tourists) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 820 विदेशी पर्यटकों (Foreign Tourists in Chhattisgarh) ने राज्य की यात्रा की। यह संख्या भले ही बहुत बड़ी न लगे, लेकिन यह संकेत जरूर देती है कि दुनिया भर के यात्रियों की नजर अब छत्तीसगढ़ की अनछुई प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता पर पड़ रही है।
राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल (Chhattisgarh Tourism Board) द्वारा विकसित की जा रही आधुनिक पर्यटन सुविधाएँ भी इस बढ़ती लोकप्रियता का बड़ा कारण बन रही हैं। बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटन केंद्रों का विकास, डिजिटल प्रचार और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के कारण विदेशी पर्यटकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति का अद्भुत संगम
छत्तीसगढ़ को अक्सर “पर्यटकों का स्वर्ग” कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्रकृति और संस्कृति का ऐसा संगम देखने को मिलता है जो देश के अन्य हिस्सों में कम ही दिखाई देता है। राज्य में स्थित चित्रकोट जलप्रपात (Chitrakote Waterfall) को भारत का ‘नियाग्रा फॉल’ कहा जाता है। बारिश के मौसम में इसकी भव्यता देखने के लिए बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक पहुँचते हैं।
इसके अलावा तीरथगढ़ जलप्रपात (Tirathgarh Waterfall) और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Kanger Valley National Park) की जैव विविधता प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। घने जंगल, दुर्लभ वन्यजीव और प्राकृतिक गुफाएँ इस क्षेत्र को साहसिक पर्यटन के लिए भी खास बनाती हैं।
इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटक सिरपुर (Sirpur Archaeological Site) और रतनपुर (Ratanpur Temple Town) जैसे प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। इन स्थानों की ऐतिहासिक विरासत और स्थापत्य कला विदेशी पर्यटकों को भारतीय सभ्यता के पुराने आयामों से परिचित कराती है। इसी तरह बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति, लोकनृत्य और पारंपरिक उत्सव भी दुनिया भर के पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक अनुभव बनते जा रहे हैं।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहल
राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए कई योजनाएँ लागू कर रही है। प्रमुख पर्यटन स्थलों तक बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटक सूचना केंद्रों की स्थापना और आधुनिक होटल व होम-स्टे सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए ईको-टूरिज्म (Eco Tourism in Chhattisgarh) और ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल पर्यटकों को आकर्षित करना ही नहीं बल्कि स्थानीय समुदायों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना भी है।
इसके अलावा प्रशिक्षित पर्यटन गाइड, डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रचार-प्रसार और पर्यटन स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास भी तेजी से किया जा रहा है। इन प्रयासों के कारण राज्य में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
(Foreign Tourists) बस्तर बन रहा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हब
छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र विदेशी पर्यटकों (Foreign Tourists) के लिए सबसे अधिक संभावनाशील पर्यटन गंतव्य के रूप में उभर रहा है। यहाँ की प्राकृतिक संपदा, जलप्रपात, राष्ट्रीय उद्यान और आदिवासी संस्कृति दुनिया भर के यात्रियों को आकर्षित करती है।
बस्तर का प्रसिद्ध बस्तर दशहरा (Bastar Dussehra Festival) विश्व के सबसे लंबे चलने वाले सांस्कृतिक उत्सवों में से एक है। यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि जनजातीय संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन है, जिसे देखने के लिए विदेशों से भी पर्यटक पहुँचने लगे हैं।

इसी क्षेत्र में स्थित चित्रकोट फॉल्स टेंट सिटी प्रोजेक्ट (Chitrakote Tent City Project) भी पर्यटन को नई दिशा देने वाला है। चित्रकोट फॉल्स के पास तीर्था गांव में प्रीमियम लक्जरी टेंट सिटी विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इस परियोजना के तहत चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट (Chitrakote Indigenous Nature Retreat) नाम से एक व्यापक पर्यटन योजना तैयार की जा रही है, जिसे पर्यटन मंत्रालय को भेजा जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य चित्रकोट को विश्व स्तर का प्रकृति और संस्कृति आधारित पर्यटन गंतव्य बनाना है।
सुरक्षा व्यवस्था में सुधार से बढ़ा भरोसा
बस्तर (Foreign Tourists) क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव भी पर्यटन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा यह क्षेत्र अब तेजी से शांति और विकास की ओर बढ़ रहा है।
बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, सड़कों का विस्तार और पर्यटन सुविधाओं के विकास से न केवल देशी बल्कि विदेशी पर्यटकों का विश्वास भी बढ़ रहा है। यही कारण है कि अब बस्तर धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर जगह बना रहा है।
(Foreign Tourists) अंतरराष्ट्रीय मेहमानों ने की सराहना
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मेंटर और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन ने बस्तर की छह दिवसीय यात्रा की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय समुदायों की जीवन शैली की खुलकर प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि बस्तर दुनिया के लिए एक अनूठा पर्यटन अनुभव प्रस्तुत करता है, जहाँ पर्यटक प्रकृति के करीब रहकर स्थानीय संस्कृति को गहराई से समझ सकते हैं। ऐसी अंतरराष्ट्रीय यात्राएँ और सकारात्मक अनुभव विदेशों में छत्तीसगढ़ की छवि को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सरगुजा और जशपुर में भी पर्यटन की अपार संभावनाएँ
छत्तीसगढ़ के मैनपाट हिल स्टेशन (Mainpat Hill Station) और जशपुर की हरित घाटियाँ भी विदेशी पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक बनती जा रही हैं। शांत वातावरण, पहाड़ी वन क्षेत्र और प्राकृतिक जैव विविधता इन इलाकों को प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श पर्यटन स्थल बनाती है। सरगुजा और जशपुर में एडवेंचर टूरिज्म और ट्रेकिंग की भी काफी संभावनाएँ हैं। राज्य सरकार इन क्षेत्रों में पर्यटन अवसंरचना विकसित करने के लिए विशेष योजनाएँ तैयार कर रही है।
डिजिटल प्रचार से बढ़ेगी वैश्विक पहचान
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड अंतरराष्ट्रीय स्तर (Foreign Tourists) पर प्रचार-प्रसार के लिए कई रणनीतियाँ अपना रहा है। पर्यटन मेलों में भागीदारी, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रचार, तथा स्थानीय संस्कृति और हस्तशिल्प को पर्यटन से जोड़ने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में ही नहीं बल्कि एक विशिष्ट सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।
आने वाले वर्षों में बढ़ेगी विदेशी पर्यटकों की संख्या
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पर्यटन अवसंरचना का विकास इसी गति से जारी रहा तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ विदेशी सैलानियों के लिए एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है। प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता, बेहतर होती सुविधाएँ और सुरक्षित वातावरण मिलकर राज्य को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। वर्ष 2025 में 820 विदेशी पर्यटकों का आगमन इसी सकारात्मक बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।

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