Iran-Israel War : मिडिल ईस्ट क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव (India-Iran Trade) का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। इजरायल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों के बाद ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया से हालात और संवेदनशील हो गए हैं। क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने के साथ ही ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है, जिसका असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि भारत ईरान से क्या-क्या आयात करता है और मौजूदा हालात महंगाई को किस हद तक प्रभावित कर सकते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है ईरान
भारत और ईरान (India-Iran Trade) के बीच संबंध दशकों पुराने हैं। दोनों देशों ने वर्ष 1950 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और 1970 के दशक के बाद व्यापारिक सहयोग तेजी से मजबूत हुआ। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद दोनों देशों ने वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था, जैसे रुपया-रियाल तंत्र, के जरिए व्यापार जारी रखने की कोशिश की।
ईरान भारत के लिए केवल ऊर्जा आपूर्ति का स्रोत ही नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चाबहार बंदरगाह में भारत का निवेश मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक व्यापारिक पहुंच को आसान बनाता है, जिससे यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का अहम केंद्र बन गया है।
India-Iran Trade ईरान से भारत क्या-क्या खरीदता है
कच्चा तेल
एक समय ईरान भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। हालांकि प्रतिबंधों के कारण आयात में बदलाव आया, लेकिन वैश्विक बाजार में ईरान से सप्लाई प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ेगा।
पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केमिकल्स
भारत ईरान से कई प्रकार के पेट्रोकेमिकल उत्पाद और औद्योगिक रसायन आयात करता है। इनका उपयोग प्लास्टिक, उर्वरक, दवा निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में होता है। सप्लाई बाधित होने पर उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
सूखे मेवे और फल
ईरान (India-Iran Trade) से पिस्ता, खजूर, केसर सहित कई सूखे मेवे भारत में आयात किए जाते हैं। इसके अलावा कुछ फल जैसे सेब और कीवी भी आते हैं। युद्ध या तनाव की स्थिति में सप्लाई चेन प्रभावित होने पर इन उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है।
कांच और औद्योगिक उत्पाद
ईरान से कुछ विशेष ग्लासवेयर और औद्योगिक सामग्री भी आयात होती है। इनकी हिस्सेदारी सीमित जरूर है, लेकिन कीमतों में वृद्धि छोटे और मध्यम उद्योगों की लागत बढ़ा सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ी चिंता
भारत की ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और भारत के कच्चे तेल आयात का बड़ा भाग इसी रास्ते से होकर आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग में किसी प्रकार की बाधा आती है तो भारत के कुल मासिक तेल आयात का लगभग आधा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इससे वैश्विक तेल कीमतों में उछाल और आयात खर्च में भारी वृद्धि की आशंका है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर
यदि मिडिल ईस्ट में तनाव (India-Iran Trade) लंबा खिंचता है तो इसका असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि, रसोई गैस महंगी होना, हवाई किराए में बढ़ोतरी, परिवहन लागत में इजाफा और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है। ऊर्जा लागत बढ़ने से लगभग हर उद्योग प्रभावित होता है, जिसका परिणाम महंगाई के रूप में सामने आता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार की अनिश्चितता जितनी लंबी चलेगी, महंगाई (India-Iran Trade) का दबाव उतना ही बढ़ सकता है। इसलिए भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और वैकल्पिक सप्लाई चैन विकसित करना भविष्य की बड़ी जरूरत बनता जा रहा है।

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