Rajdhani times chhattisgarh :-रायगढ़ -कूल्हे में लगातार दर्द और चलने में परेशानी से जूझ रहे मरीजों के लिए रायगढ़ जिला अस्पताल राहत का केंद्र बन रहा है। यहां कूल्हे की टीबी से पीड़ित मरीजों का नियमित उपचार और सर्जरी की जा रही है, जिससे वे फिर से सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
इलाज से लौटी चलने की क्षमता
तहसील तमनार के ग्राम-जरेकेला निवासी 33 वर्षीय गुलाब राम, जो पेशे से मिस्त्री हैं, चार माह पूर्व गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल लाए गए थे। कूल्हे की टीबी से पीड़ित होने के कारण वे चलने में पूरी तरह असमर्थ थे, जिससे उनकी आजीविका भी प्रभावित हो रही थी। जिला अस्पताल में डॉ.राजकुमार गुप्ता, डॉ. दिनेश पटेल, डॉ. विमल नायक, डॉ. सिद्धार्थ सिंह एवं फिजियोथैरेपिस्ट की टीम द्वारा निरंतर उपचार किया गया, जिसके परिणामस्वरूप आज गुलाब राम पुनः चलने में सक्षम हो गए हैं। इसी प्रकार जिले के लोईंग क्षेत्र के कछार निवासी 22 वर्षीय एम.ए. अंतिम वर्ष की छात्रा डिम्पल पटेल भी कूल्हे की टीबी से ग्रसित होकर अस्पताल आई थीं। उन्हें चलने में अत्यधिक कठिनाई हो रही थी। लगभग 20 दिनों के उपचार और दो सफल ऑपरेशन के बाद उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वे अब अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुकी हैं।
12 कूल्हे और 7 घुटने रिप्लेसमेंट का हुआ सफल उपचार
जिला प्रशासन के निर्देश एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत तथा सिविल सर्जन सह अधीक्षक डॉ. दिनेश पटेल के मार्गदर्शन में जिला अस्पताल में कूल्हे की टीबी से ग्रसित मरीजों का विशेष चिकित्सकों की टीम द्वारा सफल उपचार एवं सर्जरी की जा रही है। सिविल सर्जन डॉ. दिनेश पटेल ने बताया कि जिले में कूल्हे की टीबी के मामले सामने आ रहे हैं, जिनका समय पर इलाज कर मरीजों को फिर से सामान्य जीवन जी रहे है। सिविल सर्जन ने बताया कि अब तक जिला अस्पताल में 12 कूल्हे रिप्लेसमेंट और 7 घुटने रिप्लेसमेंट का सही उपचार किया गया हैं। उपचार प्राप्त कर चुके मरीजों ने अस्पताल की सुविधाओं, समय पर दवा, भोजन और देखभाल की सराहना करते हुए आम जनता से अपील की है कि ऐसे लक्षण दिखने पर जिला अस्पताल में आकर सुरक्षित इलाज व सर्जरी कराएं और अपने जीवन को फिर से सुखद व सफल बनाएं।
कूल्हे की टीबी के प्रमुख लक्षण
कूल्हे की टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होने वाला गंभीर लेकिन इलाज योग्य रोग है। इसके लक्षणों में लगातार कूल्हे का दर्द, लंगड़ापन, सूजन, अकड़न और जोड़ की गति में कमी शामिल है। इसका निदान एक्स-रे, एमआरआई, ब्लड टेस्ट एवं जोड़ से तरल पदार्थ की जांच द्वारा किया जाता है। प्रारंभिक अवस्था में एंटी-टीबी दवाओं से इलाज संभव है, जबकि गंभीर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता होती है।







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