Bridge Construction Scam : 11 करोड़ की लागत, अधूरा पुल, और अब दरारें! किंकारी नाला में करोड़ों का खेल!

किंकारी नाला पर करोड़ों की लागत से बना अधूरा पुल मानसून की पहली बारिश में ही सवालों के घेरे में, दरारें, अमानक मिट्टी और अधूरा निर्माण ग्रामीणों के लिए बना संकट।

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किंकारी नाला में अप्रोच रोड पर दिख रही दरारें और उखड़ा हुआ पिल्लर
Highlights
  • एप्रोच रोड में खेत की कन्हार मिट्टी, स्लैब में दरारें, पिलर निर्माण में गड़बड़ी उजागर
  • ठेकेदार को बार-बार समयवृद्धि, विधानसभा में उठने के बाद भी कार्रवाई ढीली
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गजानंद निषाद, Baramkela News : मानसून की पहली बारिश ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के (Bridge Construction Scam) बरमकेला ब्लॉक स्थित किंकारी नाला पुल निर्माण में की जा रही अनियमितताओं की पूरी तस्वीर सामने ला दी है। ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर बड़े नवापारा-विक्रमपाली मार्ग पर बन रहे इस पुल की लागत 11.63 करोड़ रुपये है, जिसे वर्ष 2021 में प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी, जबकि तकनीकी स्वीकृति 9.63 करोड़ रुपये तक सीमित रखी गई थी।

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निर्माण प्रारंभ से ही लापरवाही और गड़बड़ियों (Bridge Construction Scam) का पर्याय बन गया। ठेकेदार द्वारा काम धीमी गति से किए जाने पर सेतु निर्माण विभाग ने समयवृद्धि देकर फिर से निर्माण करने की अनुमति दी। इसके बावजूद पुल के एप्रोच मार्ग में खेतों की कन्हार मिट्टी का उपयोग कर अमानक स्तर का कार्य किया गया। शिकायतों के बाद जांच में भी यह मिट्टी खराब पाई गई, फिर भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

अब मानसून की पहली बौछारों में पुल (Bridge Construction Scam) की असलियत उजागर हो गई है। बरमकेला और बड़े नवापारा की ओर एप्रोच रोड पर जहां-तहां दरारें, कंकड़-पत्थर से छुपाई गई मिट्टी, और स्लैब में क्रैक देखे जा रहे हैं। पिलर नंबर 5 निर्माण में भी खामियां पाई गई हैं। निर्माण अधूरा होने के बावजूद पुल की रेलिंग पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

सबसे गंभीर बात यह है कि यह मामला विधानसभा सत्र में भी उठ चुका है। सारंगढ़ विधायक उत्तरी जांगड़े ने बजट सत्र के दौरान पुल निर्माण में गड़बड़ी को लेकर जांच की मांग की थी। लेकिन उसके बाद भी ठेकेदार को समयवृद्धि देकर बचा लिया गया और अब उसने निर्माण कार्य बंद कर रखा है।

ग्रामीणों ने इस पर भी सवाल उठाए हैं कि ठेकेदार द्वारा बिना विभागीय जांच के सीमेंट, गिट्टी, बालू, छड़ जैसी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके बावजूद न तो अर्थदंड लगाया गया और न ही ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया।

 

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दूसरे एजेंसी से कार्य कराया जाएगा (Bridge Construction Scam)

सेतु निर्माण विभाग के ईई रमेश कुमार वर्मा ने जवाब में कहा, “ठेकेदार का भुगतान रोका गया है, अनुबंध टर्मिनेट कर दिया गया है। खराब मिट्टी को उखाड़ कर दोबारा निर्माण के निर्देश दिए गए हैं। दरारें नहीं, बल्कि लिंकेज हैं। यदि निर्देशों का पालन नहीं होता तो दूसरे एजेंसी से कार्य कराया जाएगा।”

फिलहाल स्थिति यह है कि अधूरे पुल के कारण बरसात में ग्रामीणों को पुराने पुल से गुजरना पड़ रहा है, जो तेज बहाव में डूबने की आशंका को जन्म देता है। ऐसे में विभागीय लापरवाही और ठेकेदार की मनमानी आमजन की सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है।

 

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